10+ भारत की ऐतिहासिक इमारतें एवं सम्पूर्ण जानकारी

Bharat ki Aitihasik Imarat in Hindi : प्रचीन कल से ही भारत को ऋषि मुनियों और साधु संतो देश कहा जाता है। प्रचीन काल में भारत देश की प्रशिद्धि इस तरह से थी , इसे सोने की चिड़ियाँ के नाम से जाना जाता था। भारत को कितने शाशकों ने लुटा खसोटा फिर भी आज भी भारत के कोने कोने में एक से बढ़कर का ऐतिहासिक ईमारत आपको यहाँ देखने को मिलती है। भारत के हर हिस्सों में आपको मदिर किले, खूबसूरत इमारते और मीनारे देखने को मिलती है। जिससे आपको यहाँ के गौरव शाली इतिहास के बारे में पता चलता है। इन इमारतों से भारत के कुशल कारीगरों , वीर वीरांगनाओं , योद्धाओं और राजनीगयों के बारे में पता चलता है।

भारत की ऐतिहासिक इमारते और घूमने की जगह

समय समय में यहाँ बहुत सारे शासकों ने शाशन किया और अपने समय में कुछ अद्भुत इमारतों का भी निर्माण करवाया , जिसकी अद्भुत वस्तुकला की दुनियाँ आज भी दीवानी है। इन ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों के कारन सालों भर आपको देश विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक यहाँ देखने को मिलते हैं। जिस कारण से भारतीय गवर्नमेंट को इन पर्यटन स्थलों और ऐतिहासकि इमारतों के कारण अच्छी खासी कमाई हो जाती है। इन इमारतों के वास्तुकला के कारण भारत के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।

इस लेख में आपको ऐसे ही भारत की ऐतिहासिक इमारत के बारे विस्तार से जानने को मिलेगा , जिसके मदद से आप आगे घूमने का प्लान काफी अच्छी तरह से कर सकते हैं और ऐतिहासिक इमारतों एवं देश के धरोहर के बारे में काफी कुछ जानने को मौका मिलता है।

भारत की ऐतिहासिक इमारतें | Bharat ki Aitihasik Imarat in Hindi

ताज महल

भारत में जब कभी भी ऐतिहासिक स्थलों के बारे में बात की जाती है तो सबसे पहले भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में ताजमहल की ही बात आती है। ताज महल विश्व के साथ अजूबों के रूप में प्रशिद्ध है। इसे उनेस्को के विश्व धरोहर के स्थल के रूप में भी शामिल किया गया है।

Taj Mahal
Taj Mahal

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ताजमहल प्रेम के निशनी के रूप में प्रशिद्ध है। जिसे मुगल शाशक शाहजहाँ ने अपने पत्नी मुमताज बेगम के याद में बनवाया था। शाहजहाँ मुगल शासक के पांच वे शासक थे। मुगल शासक शाहजहाँ ने 17 वीं शताब्दी में ताजमहल का निर्माण करवाया था।

मुगलों ने अपने शासन काल में ज्यादातर महलों का निर्माण लाल पत्थरों से करवाया था। यहाँ आपको सिर्फ ताजमहल ही का ऐसा ऐतिहासिक इमारत देखने को मिलता है जिसे बनवाने के लिए सफ़ेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया था। ताजमहल की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए इसमें सिर्फ सफ़ेद संगमरमर ही नहीं बल्कि और भी अन्य कीमती तथा खूबसूरत पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

इस ऐतिहासिक इमारत में आपको मुगलकालीन वास्तुकला देखने को मिलती है जो की ताजमहल की खूबसूरती में चार चाँद लगाने का काम करती है। ताजमहल को बनाने में 20000 से भी ज्यादा कारीगरों ने काम किया था। इन कारीगरों का नेतृत्व शिल्पकार उस्ताद अली अहमद लाहोरी ने किया था। ताजमहल को पूर्ण रूप से तैयार करने में 22 वर्ष का समय लगा था।

इसका निर्माण कार्य 1632 ईस्वी में शुरू हुआ था और यह 1653 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था। यह मुमताज महल के नाम से भी प्रशिद्ध है। इसे बनवाने के लिए उस समय के हिसाब से 320 लाख रूपये खर्च किये गए थे और आज से समय में इन रुपयों की कीमत 52 अरब रूपये से भी ज्यादा हो जाती है। आज भी सालों भर यहाँ आपको पर्यटकों का जमावड़ा देखने को मिलता है। देशी हो या विदेशी हर तरह के पर्यटकों के द्वारा इसे खूब पसंद किया जाता है। अगर आप कभी भारत भर्मण के बारे में सोच रहे हैं तो इसे अपने घूमने की लिस्ट में जरूर शामिल करें।

विक्टोरिया मैमोरियल

भारत की ऐतिहासिक इमारत की बात करें तो कोलकता का विक्टोरिया महल काफी प्रशिद्ध है। यह आपको पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में देखने को मिलता है। जिसे की मेमोरियल इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के लिए बनवाया गया था। इसे 1906 से 1921 के बीच बनवाया गया था। यहाँ आपको विभिन्न शिल्पकलाओं का सूंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

Victoria Memorial
Victoria Memorial

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भारत की ऐतिहासिक इमारत रानी विक्टोरिया मेमोरियल को आम जनता के लिए 1921 से पर्यटन स्थल के रूप में खोला गया था। यहाँ आप मुग़ल शिल्प कलाओं के मिश्रण को देख सकते हैं। यहाँ आपको रानी विक्टोरिया के द्वारा उपयोग में लायी जाने वाली चीजें देखने को मिलती है। यहाँ आप रानी विक्टोरिया के पियानो , स्टडी डेस्क सहित 3000 से भी अधिक चीजों को देखने का मौका मिलता है। भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध इस महल में आपको शाही परिवार के बहुत सारी चित्रों को देखने का मौका मिलता है।

फतेहपुर सीकरी

फतहेपुर सिकरी भारत की इतिहासिक इमारत के रूप में काफी प्रशिद्ध है। यह पहले मुगलों की राजधानी हुआ करती थी। यह आपको उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से 40 किलोमीटर की दुरी में देखने को मिलती है। मुगल शासक अकबर ने काफी समय तक इसे अपनी राजधानी के रूप में इस्तेमाल किया था। लगभग 1571 से 1550 तक मुगलों ने इसे अपनी राजधानी के रूप में इस्तेमाल किया ,फिर 1610 में अकबर ने अपने शासन कल में इसे पूरी तरीके से छोड़ कर अपनी राजधानी को कही और बनवा लिया था।

Fatehpur Sikri
Fatehpur Sikri

अकबर ने अपने शासन काल में यहाँ फतेहपुर सिकरी में काफी सारे ऐतिहासिक इमारतों तथा प्राचीन धरोहर का निर्माण करवाया था। इन सारे इमारतों में सबसे ज्यादा प्रशिद्ध बुलंद दरवाजा है जिसे की देशी विदेशी पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद किया जाता है। बुलंद दरवाजे को बनवाने में 12 वर्षों का समय लगा था। 1601 में औरंगजेब ने इसे गुजरात में विजय हाँसिल करने के याद में बनवया था।

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बुलंद दरवाजा हिन्दू और फ़ारसी वास्तुकला का बना अद्भुत नमूना है जो की भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में काफी प्रशिद्ध है। यहाँ आपको एक शिलालेख भी देखने को मिलता है , जहाँ आपको अकबर के खुले धार्मिक प्रवृति को देखने का मौका मिलता है। भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में प्रशिद्ध बुलंद दरवाजा विश्व का सबसे ऊँचे दरवाजे के रूप जाना जाता है , जिसकी ऊंचाई 53 मीटर और चौड़ाई 35 मीटर है।

कुतुब मीनार

भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में क़ुतुब मीनार भी शामिल है। यह आपको दिल्ली के महरौली में देखने को मिलता है। इसे बनवाने का श्रेय कुतुबुदीन को जाता है जो की गुलाम वंश का शासक था। क़ुतुब मीनार को मुस्लिम सम्राज्य का प्रथम वास्तुकला बताया जाता है। क़ुतुब मीनार को अफगानिस्तान स्थित जामा की मीनार से प्रेरित होकर बनवाया गया था।

Qutab Minar
Qutab Minar

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क़ुतुब मीनार को बनवाने का कार्य कुतुबुद्दिन ऐबक ने शुरू किया था , लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरीके से नहीं बनवा पाया। कुतबुद्दीन सिर्फ इस मीनार की आधार को ही बनवाने में सक्षम रहे। इसके बाद इस मीनार की आधी से अधिक काम को उनके दामाद इल्तुतमिश ने पूरा करवाया था। इल्तुतमिश ने इस मीनार को 4 मंजिल तक काफी अच्छी तरीके से बनवाया था। उसके बाद पांचवी मंजिल का निर्माण फ़िरोज शाह तुगलक के करवाया था।

इस मीनार को बनवाने के लिए सिर्फ लाल बलुवा पत्थर का इस्तेमाल किया गया था। मीनार की दीवारों में आपको कुरान के चित्र भी देखने को मिलते हैं , जिन्हे अरबी भाषा में लिखा गया है। भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में प्रशिद्ध यह मीनार मुस्लिम साम्राज्य के अद्भुत वास्तुकला को दर्शाता है।

भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में प्रशिद्ध यह मीनार दुनियाँ के सबसे ऊँची मीनार के रूप में प्रशिद्ध है। जो की पांच मंजिली इमारत है और जिसकी ऊंचाई 73 मीटर है। यहाँ आपको 379 सीढ़ियाँ देखने को मिलेगी जिसके मदद से पर्यटक मीनार की ऊंचाई तक पहुँचते थे ,लेकिन वर्तमान समय में यह रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

हवा महल

हवा महल आपको राजस्थान के जयपुर में देखने को मिलेगा , जो की भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध है। राजस्थान का यह प्रशिद्ध शहर जो की पिंक सिटी आय गुलाबी शहर के नाम से प्रशिद्ध है। यहाँ आपको राजशी महल के रूप में प्रशिद्ध यह हवा महल देखने को मिलता है। इसे बनवाने के लिए लाल तथा गुलाबी बलुवा पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। यह बाहर से देखने में बिलकुल ही मधुमक्खी के छत्ते की तरह दिखाई देती है। इस बनवाने में 10 वर्ष का समय लगा था। इसे बनवाने का श्रेय महाराजा सवाई परताप सिंह को जाता है जिन्होंने 1799 में इसे बनवाया था। सामने से देखने में यह महल बिलकुल राजमहल के तरह ही दिखती है। इस महल का डिजाइन लालचंद उस्ताद द्वारा किया गया था।

Hawa Mahal
Hawa Mahal

भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में प्रशिद्ध यह महल जो की हवा महल के रूप में जाना जाता है। इसे हवा महल कहने के पीछे एक खास वजह है। यहाँ आपको छोटी छोटी काफी खूबसूरत 950 जालीदार खिड़कियां देखने को मिलती है। खिड़कियों के जालीदार होने के कारण , यहाँ की औरतों के लिए पर्दे में रहते हुए भी काफी अच्छी तरह प्राकृतक हवा की व्यवस्था हो जाती थी।

इन नक्काशिदार जालियों बने खिड़कियों में आपको कंगूरे और गुम्बंद मिलते हैं। खिड़कियों के जालीदार होने की वजह से यहाँ की महिलायें पर्दा प्रथा की शक्ति से पालन करते हुए बहार होने वाले गतिविधायों पर भी बड़ी आसानी से नजर रख सकती थी।

जब कभी भी राजस्थान घूमने के लिए आये तो यहाँ भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध इस हवा महल में घूमने के लिए आयें।

कोणार्क मंदिर

भगवान सूर्य को समर्पित यह कोणार्क मंदिर आपको बंगाल की तट उड़ीसा शहर में देखने को मिलती है। जो की पूरी से मात्र 35 किलोमीटर कि दुरी में स्थित है। भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध इस मंदिर को पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद किया जाता है। यह मंदिर अपनी प्रचीन वास्तुकला और अद्भुत आकर के कारण काफी ज्यादा प्रशिद्ध है। इस सूर्य देव की मंदिर में आपको रोजाना लाखों की संख्या में पर्यटक देखने को मिलते हैं , जो की दुनियाँ भर से इसकी प्राचीन वास्तुकला और विशिष्ट आकर के कारण पर्यटक यहाँ खींचे चले आते हैं।

Konark mandir
Konark mandir

यह कोणार्क मंदिर देखने में आपको बिलकुल एक रथ के सामान लगता है। इस मंदिर में आपको 12 जोड़े पहिये और 7 घोड़े देखने को मिलते हैं। जो देखने में बिलकुल रथ के सामान ही लगता है। मनो जैसे 7 घोड़े मिलकर रथ को खिंच रहे हैं। ये सारे कुछ समय कल चक्र को दर्शाते हैं। 7 घोड़े सातों दिन के मतलब को समझाते हैं। 12 जोड़े पहिये 24 घंटे तथा 12 महीने को दर्शाते हैं।

अगर आप यहाँ घूमने के लिए आ रहे हैं तो यहाँ सूर्योदय के समय आपको एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। सूर्योदय के समय जब सूर्य की रौशनी मंदिर के गर्भ गृह में पड़ती है तो उसके बाद मंदिर पूरी तरीके से प्रज्वलित हो जाती है। जिसके बाद इस मंदिर की खूबसूरती देखते हीं बनती है , इस समय यह मंदिर काफी अलौकिक लगता है।

चार मीनार

हैदराबाद अपने चारमीनार के कारण पुरे दुनिया भर में काफी प्रशिद्ध है। भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में हैदराबाद के चार मीनार का अपना एक अलग ही स्थान है। तेलंगाना में यह आपको मूसा नदी के के किनारे देखने को मिलता है। जो की समारक और मस्जिद के रूप में प्रशिद्ध है। इसे मोहमद कुली क़ुतुब शाह ने 1591 बनवाया था। जैसे की नाम से ही पता चलता है चार मीनार का अर्थ होता है चार टॉवर , चार स्तम्भ या चार स्मारक।

Charminar
Charminar

यह 400 से भी ज्यादा पुराना मस्जिद है। यहाँ पर मनाये जाने वाले ईद उल अधा और ईद उल फितर जैसे खास पर्वों में यहाँ का नजारा काफी खबसूरत होता है और इसे काफी खूबसूरती के साथ सजाया जाता है। चार मीनार के पास ही आपको लाड बाजार और पाथेर गट्टी देखने को मिलती है , जो विशेष तरह की चूड़ियों और आभूषणों के लिए काफी ज्यादा प्रशिद्ध है। यहाँ आपको चारमीनार के दक्षिण पश्चिम में एक मक्का मस्जिद भी देखने को मिलता है जिसे की समृद्ध ग्रेनाइट से बनाया गया है। जो की पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है।

दिलवाडा मंदिर

यह दिलवाड़ा मंदिर आपको राजस्थान में देखने मिलता है। जो की राजस्थान के माउन्ट आबू से ढाई किलोमीटर की दुरी में देखने को मिलता है। यहाँ की हरी भरी अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह दिलवाड़ा मदिर भारत की ऐतिहासिक इमारतों के रूप में काफी प्रशिद्ध है। इस मंदिर की खूबसूरती ताजमहल के सामान हि है यहाँ आपको 5 श्वेतांबर मंदिरों का समूह देखने को मिलता है। इस मंदिर को विमल शाह शासक के द्वारा बनवाया गया था।

Dilwara Temples
Dilwara Temples

माउंट अबू खासकर इस मंदिर के लिए ही जाना जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक इसकी खूबसूरती को देखना कभी भी नहीं भूलते हैं। यहाँ का प्राकृतिक और शांत वातावरण के कारण इसे पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद किया जाता है।

यह मंदिर अपनी सूंदर नक्कासी के लिए काफी प्रशिद्ध है। इस मंदिर की शानदार आर्किटेक्चर और बेहतरीन डिजाइन के कारण यह पुरे विश्व में भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में प्रशिद्ध है।

सांची स्तूप

भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध साँची स्तूप , यह आपको मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बेतवा नदी के किनारे देखने को मिलता है। जो भारत के अद्भुत वास्तुकला का एक जबरदस्त उधारण है। यहाँ आपको तीन स्तूप देखने को मिलते हैं और तीनों ही वर्ल्ड हेरिटेज की साइट में सम्मलित हैं।

Sanchi Stupa
Sanchi Stupa

इस साँची के स्तूप को मौर्य सम्राज्य के शासक अशोक ने बनवाया था। यहाँ के पहले स्तूप को तीसरी शताब्दी में बनवाया गया था। जो 16.4 मीटर ऊँचा और गोलाई या व्यास 36 .5 मीटर है। यहाँ आपको तीसरी शताब्दी से लेकर 12 वीं शताब्दी के बीच बनाये गए बहुत सारे बौद्ध स्मारक भी देखने को मिलते हैं। इन स्तूपों में आपको कई सारे तोरण भी देखने भी देखने को मिलते हैं। यहाँ आपको चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है जिसे की पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद किया जाता है। इस स्तूप को प्रेम शांति साहस विस्वास का प्रतीक माना जाता है।

मैसूर महल

मैसूर पैलेश भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में जाना जाता है। मैसूर पैलेश को अंबा विलास भवन भी कहा जाता है। इस महल में आप इंडो , सारसेनिक , दर्विडियन , रोमन और ओरिएंटल शैली के वास्तुकला आपको देखने को मिलता सकते हैं। इस तीन मंजिले इमारत को बनाने में भूरे ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है। , जिसमें तीन गुलाबी संगमरमर के गुम्बंद देखने को मिलते हैं।

Mysore Palace
Mysore Palace

महल के साथ साथ आपको एक पांच मंजिला टावर भी देखने मिलता है , जिसकी ऊंचाई 44 . 2 मीटर है . जिसका गुबंद को पूरी तरीके से सोने से बनाया गया है। भारत की ऐतिहासकि इमारत के रूप में प्रशिद्ध यह मैसूर महल को विश्व में सर्वाधिक घुमा जाने वाला पर्यटन स्थलों में से एक है। इसका ठोस सबूत आपको न्युयॉर्क टाइम्स में आपको देखने को मिलता है। इसने भारत की ऐतिहासिक इमारत मैसूर पैलेश को 31 सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले स्थानों में शामिल किया है।

लाल किला

भारत की ऐतिहासकि ईमारत के रूप में प्रशिद्ध इस लाल किले का निर्माण शाहजहाँ ने अपने सभा के रूप में राजनैतिक केंद्र के लिए करवाया था। दिल्ली की शान एवं पहचान कहे जाने वाला यह मुगल किला आपको दिल्ली के केंद्र में देखने को मिलता है। शाहजहाँ ने अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली में शिफ्ट करने के बाद इस 1638 में इस किले की निर्माण प्रक्रिया को शुरू कर दिया था। इसे पूरी तरह से बनकर तैयार होने में 10 वर्ष लगा था। 1648 में यह पूरी तरीके से बनाकर तैयार हो गया था। लाल किले को 2007 में उनेस्को के द्वारा विश्व विरासत स्थल के रूप में शामिल किया गया है।

Red Fort
Red Fort

इस किले को बनवाने के लिए सिर्फ लाल पत्थरो का इस्तेमाल किया गया है अंदर सजावट के लिए संमरमर का भी इस्तेमाल किया गया है। शुरुवाती के दिनों में इस किले को ‘किला एक मुबारक’ का नाम दिया गया था। दुनियाँ की बेशकीमिती हीरा ”कोहिनूर हीरा” भी कभी इस इमारत की शान हुआ करती थी। जिसे अंग्रेजो ने अपने शाषन कल के दौरान यहाँ से उड़ा ले गए।

दिल्ली में स्थित यह लाल किला भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप काफी प्रशिद्ध है। यहाँ 200 साल तक मुगलों का शाषन रहा , यहाँ की आर्किटेक्टर आपको अष्टकोण में देखने को मिलती है।

पर्यटकों के द्वारा इसे काफी पसंद किया जाता है। किले के अंदर पर्यटकों के लिए देखने के लिए काफी कुछ की व्यवस्था है जैसे की मोती मस्जिद , नौबत खाना जैसी बड़ी ईमारत , साथ ही बड़े बड़े बगीचा एवं संग्रहालय। अगर आप 15 अगस्त के समय में यहाँ घूमने के लिए आते हैं तो इस दौरान आप यहाँ प्रधानमंत्री को झंडा फहराते हुए देख सकते हैं।

इंडिया गेट

दिल्ली के केंद्र में स्थापित इस इंडिया गेट को देशी हो या विदेशी पर्यटकों के द्वारा काफी पसंद किया जाता है। भारत की ऐतिहासिक इमारत के रूप में जाना जाने वाला इंडिया गेट भारत के राष्ट्रीय स्मारक के रूप में काफी प्रशिद्ध है। इस स्मारक को पेरिश के आर्क दी ट्राईओम्फो के नाम से प्रेरित होकर बनवाया गया है। इस समारक की ऊंचाई 42 मीटर है। इस स्मारक को 70000 शहीदों की याद में बनवाया गया था इन शहीदों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजी सेना की तरफ से लड़ते हुए अपनी प्राण गवाए थे। इस इमारत को बनवाने की शुरुवात महामहिम ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में किया था , लेकिन इसे पूरी तरीके से बनवाने का काम किया 1931 में लॉर्ड इरविन ने किया था।

India Gate
India Gate

निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से आपको भारत की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में विस्तार से सारी जानकारी मिल जाती है। पुरे भारत में आपको ऐसे ही अनेको छोटी बड़ी ऐतिहासक इमारत देखने को मिल जाते हैं। हर इमारत में आपको कुछ न कुछ खास देखने को मिलता है।

आशा करते हैं की भारत की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में दी गई इस तरह की जानकरी आपको काफी पसंद आयी होगी , अगर हमारा यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो इसे अपने जरूरतमंद मित्रो के साथ शेयर करना बिलकुल भी न भूलें।

इसके आलवा अगर आपको इस लेख से सम्बंधित किसी भी प्रकार का कोई सवाल जवाब या विचार हो तो इसे कमेंट पूछना न भूलें। आपको हर संभव सहायता की जाएगी। और अंत तक लेख पड़ने के धन्यवाद।

FAQ

भारत में कुल कितने ऐतिहासकि इमारत हैं ?

भारत में 38 विश्व धरोहर स्थल शामिल हैं।

भारत की ऊँची ऐतिहासिक इमारत कौन सी है ?

मुंबई में स्थित वर्ल्ड वन ( World One ) भारत की सबसे ऊँची इमारत (Tallest Buildings ) के रूप में प्रशिद्ध है

भारत की पहली इमारत कौन सी है ?

भारत की पहली इमारत साँची स्तूप है।

भारत में कुल कितने इमारत हैं ?

भारत में कुल 3650 से भी अधिक ऐतिहासिक इमारत देखने को मिलते हैं।

भारत में सबसे ज्यादा इमारते किस शहर में हैं ?

भारत में सबसे ज्यादा इमारते आपको मुंबई शहर में देखने को मिलते हैं।

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