चारधाम यात्रा की पूरी जानकारी और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया – [Complete Guide]

इस लेख में आपको चार धाम यात्रा से सम्बंधित सारी जानकारी काफी सरल शब्दों में जानने को मिलती है। यहाँ आपको चार धाम की यात्रा में होने वाले सारे समस्यों का निदान आपको काफी आसानी से अपने शब्दों में मिल जाएगी। चार धाम की यात्रा के दौरान होने वाले प्रमुख समस्या जैसे की चार धाम क्या होता है , चार धाम की यात्रा कितने प्रकार की होती है , चार धाम यात्रा के दौरान किन मंदिरों का दर्शन करना होता है , चार धाम यात्रा के दौरान होने किन समस्याओं का समाना करना होता है , चार धाम यात्रा में कितना खर्चा उठाना पड़ता है , चार धाम यात्रा पैकेज , चार धाम यात्रा की रजिस्ट्रेशन प्रोसेस , चार धाम यात्रा आसानी से कैसे करें इन सारे सवालों का जवाब इस लेख में काफी सरल शब्दों में देने की कोसिस की गयी है।

हिंदू धर्म में char dham ki yatra को सबसे पवित्र एवं सर्वश्रेष्ठ तीर्थ मन जाता है। पौराणिक कथाओं और हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार हर हिन्दू को जीवन में एक बार (char dham yatra) जरूर करनी चाहिए हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा करना काफी पुण्य का काम माना जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार दो तरह की चार धाम यात्रा होती है –

  • छोटी चार धाम यात्रा – इस दौरान यात्री को केदारनाथ , बद्रीनाथ , यमुनोत्री और गंगोत्री की यात्रा करनी होती है।
  • बड़ी चार धाम यात्रा – इसमें यात्री को बद्रीनाथ , द्वारका , उड़ीसा के पूरी और दक्षिण भारत की रामेश्वरम की यात्रा करनी होती है।

इस लेख में आपको दोनों प्रकार के चार धाम की यात्रा के बारे सारी जानकरी विस्तार से जानने को मिलती है। बस आपको शुरू से लेकर अंत तक इस लेख में बने रहने को जरूरत है। बिना किसी देर के चलिए शुरू करते हैं।

चार धाम यात्रा

हिन्दुओं के लिए चार धाम की यात्रा काफी विशेष महत्व है। हिन्दुओं के धर्म गुरु शंकराचार्य के द्वारा चार धाम की यात्रा को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताया गया है।

हिंदू धर्म से सम्बन्ध रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति जीवन में एक न एक बार इस चार धाम की यात्रा में जरूर जाना चाहते हैं। ताकि उसके जिंदगी में जीते जी सब कुछ मंगलमय हो और मरने के बाद भी सब कुछ मंगलमय हो। कुल मिलकर अपने घर परिवार की मंगलकामना और ख़ुशीहाली के लिए हर हिन्दू परिवार एक न एक बार यहाँ जरूर जाना चाहता है।

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हिन्दू धर्म ग्रन्थ के अनुसार दो प्रकार की चार धाम यात्रा होती है। आप अपनी शारीरिक क्षमता और बजट के अनुसार जो भी आपको अच्छा लगे उसे अपनी यात्रा क लिए चुन सकते हैं –

बड़ी चार धाम यात्रा – इस यात्रा की शुरुवात जम्मू कश्मीर के बद्रीनाथ से होती है। इसमें सबसे पहले श्रद्धालुओं को जम्मूकश्मीर के बद्रीनाथ की यात्रा करनी होती है। फिर गुजरात के द्वारिका में जाना होता है , उसके बाद उड़ीसा के पूरी में तथा अंत में तमिलनाडु के रामेश्वरम मंदिर की यात्रा के बाद इसकी समाप्ति होती है। इस यात्रा की सबसे खास बात यह होती है की यात्रा के दौरान विजिट करने वाले सारे मंदिर भगवान विष्णु या विष्णु के अवतार को समर्पित किया गया है।

छोटी चार धाम यात्रा – इसमें आपको उत्तर भारत के चार प्रशिद्ध चोटियों का भर्मण करना होता है। जिनके नाम निम्न लिखित हैं – केदारनाथ , बद्री नाथ , गंगोत्री तथा यमुनोत्री।

चार धाम से जुड़े तथ्य

अगर आप char dham ki yatra की यात्रा पर जा रहें हैं या फिर जाने की सोच रहे हैं। तो उसके पहले आपको चार धाम से जुडी कुछ चीजों के बारे में जानना बहुत ही जरुरी होता है। जिसके बाद आपको चार धाम में यात्रा करने के दौरान किसी भी तरह के परेशानियों का सामना करने की जरूरत न पड़े या फिर काफी कम कठिनाइओं की सामना करना पड़े।

  • अगर आप शंकराचार्य द्वारा स्थापित इस अद्भुत char dham yatra तैयारी में लगे हैं। जाने से पहले कुछ विशेष बातों को हमेशा अपने ध्यान में रखें। चार धाम की बड़ी यात्रा पश्चिम से शुरू होकर पूर्व दिशा में समाप्त होती है। कहने का साफ मतलब यह है की यह यात्रा गुजरात के द्वारिका से शुरू होते हुए बदीनाथ रामेश्वरम से होते हुए अंत में जगन्नाथ पूरी में समाप्त होती है।
  • देश के कुछ राज्यों जैसे की दिल्ली , हरियाणा , ऋषिकेश में राज्य सरकार द्वारा चार धाम यात्रा की यात्रा के लिए काफी अच्छी व्यवथा देखने को मिलती है। इन राज्यों में पहले आपका आधार कार्ड , पैन कार्ड बायोमैट्रिक्स चेक किया जाता है। उसके बाद सरकार की और से रहने खाने के लिए की हर संभव व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए की जाती है।
  • चार धाम की यात्रा को इसलिए भी काफी विशेष माना जाता है क्योंकि यात्रा के दौरान चारों धामों में भगवान विष्णु की ही पुजा की जाती है।
  • जो यात्री बड़ी चार धाम की यात्रा करने के लिए सक्षम नहीं होते है उनके लिए छोटी चार धाम की यात्रा की भी व्यवथा है। जिनके चारों धाम उत्तराखंड में ही स्थित है उनके नाम निम्नलिखित हैं – केदारनाथ , गंगोत्री , बद्रीनाथ और यमुनोत्री।
  • चारधाम किसी एक सम्प्रदाय के लिए नहीं है , छोटी चार धाम में आपको चार प्रमुख सम्प्रदाय देखने को मिलते हैं – वैष्णव धर्म स्थल , शैव धर्म स्थल और देवी स्थल
  • चार धाम वास्तव में एक पवित्र परिक्रमा होती है , जिसमे चार पवित्र स्थलों की परिक्रमा करना होता है।
  • यात्रा के दौरान आपको एक तप्त कुंड देखने को मिलता है , जिसे की श्रद्धालुओं के द्वारा काफी पसंद किया जाता है। इस तप्त कुंड को अग्नि देवता का वास स्थान कहा जाता है। इस कुंड का पानी औषधीय भरपूर होता है इसलिए यहाँ यह श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रशिद्ध होता है।

चार धाम की यात्रा का मार्ग

अगर आप छोटी चार धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कही दूर जाने के जरूरत नहीं है यहाँ उत्तराखंड में ही आपकी छोटी चार धाम की यात्रा पूर्ण हो जाती है। यहाँ छोटी चार धाम की यात्रा पश्चिम दिशा से शुरू होकर पूर्व में समाप्त होती है।

अगर आप उत्तराखंड के छोटी चार धाम की यात्रा की योजन बना रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें की छोटी चार धाम की यह पावन यात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है , यमुनोत्री के बाद श्रद्धालु को जल लेकर गंगोत्री की और जाना होता है , गंगोत्री में गंगा और यमुना के पावन जल को भरने के बाद श्रद्धालु केदारनाथ की और जाते हैं।

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केदारनाथ में जलाभिषेक करने के बाद यात्री का अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ होता है। इस तरह से आप छोटी चार धाम की यात्रा को काफी आसानी से पूरी कर सकते हैं।

चार धाम यात्रा नक्शा (Chardham Route Map)

sacredyatra.com
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साल 2023 में चार धाम के खुलने और बंद होने का समय

अगर आप उत्तराखंड के छोटी चार धाम की यात्रा का करने के बारे में सोच रहे हैं तो यात्रा शुरू करने से पहले एक बात को विशेष रूप से अपने दिमाग में बिठा लेना चाहिए। यहाँ आप सालों भर चार धाम की यात्रा नहीं कर सकते हैं। इसके लिए साल में एक विशेष समय को फिक्स किया गया है की क्योंकि सर्दियों के समय यहाँ पर अत्यधिक ठंडी होती है जिसके कारण इस समय में यहाँ पर यात्रा करना बिलकुल भी संभव नहीं होता है। इन मंदिरों के कपाट साल में सिर्फ गर्मियों के समय में ही कुछ समय कुछ महीनों के लिए खुलते हैं बाकि के महीनों में इन मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

इसके लिए उत्तराखण्ड में छोटी चार धाम की यात्रा करने से पहले आपको यहाँ की समय सारणी के बारे में काफी अच्छी तरह से जानकरी हांसिल कर लेनी चाहिए।

उत्तराखंड में छोटी चार धाम की यात्रा करने के लिए 2023 में यहाँ के चारों धाम में कपाट खुलने और बंद होने का समय इस प्रकार से है –

  • बद्रीनाथ धाम का फाटक 27 अप्रैल 2023 को खुलता है और 20 नवम्बर 2023 को बंद कर दिया जाता है।
  • केदारनाथ धाम के फाटक के खुलने का समय 25 – 26 अप्रैल 2023 और बंद होने का समय 14 नवंबर 2023 है।
  • गंगोत्री धाम के फाटक के खुलने का समय 22 अप्रैल 2023 और बंद होने का समय 14 नवंबर 2023 है।
  • यमुनोत्री धाम के फाटक के खुलने का समय 22 अप्रैल 2023 और बंद होने का समय 14 नवंबर 2023 है

चार धाम की यात्रा के दौरान रुकने की जगह

चार धाम की यात्रा के दौरान आपको ठहरने के लिए में किसी भी प्रकार की कोई भी कठनाई का बिलकुल भी सामना करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि यहाँ के सरकार द्वारा यात्रीयों के रुकने के लिए काफी अच्छी व्यवस्था की गयी है। यहाँ आपके ठहरने के लिए हरिधाम के समीप ही बहुत सारे आश्रम , लॉज , धर्मशाला एवं होटल मिल जाते हैं। जिनमे यात्रियों के रुकने के लिए काफी उत्तम व्यवस्था देखने को मिलती है।

बद्रीनाथ के पहड़ियों में ऐसी लगा टेंट की भी व्यवस्था आपको काफी देखने को मिलता है , इसे यहाँ की सरकार के द्वारा खाशकर के यात्रियों के लिए बनवाया गया है। इन टेंटों में रुकने के लिए यात्रियों को काफी कम खर्चे करने होते हैं।

अगर आप कम खर्च में ही रुकना पसंद करते हैं तो इसके लिए आप आश्रम या धर्मशाला में भी रुक सकते हैं। यहाँ भी काफी कम खर्चों में यात्रियों के लिए ठहरने की काफी अच्छी व्यवस्था की गयी है।

यहाँ के कुछ आश्रम यात्रियों के बीच काफी प्रशिद्ध है जैसे की बाबा कमला कमली आश्रम जोहर धाम में यात्रियों की सेवा के लिए काफी जाना जाता है। यहाँ char dham yatra के दौरान ठहरने के लिए किसी भी तरह के समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा , यात्रा के दौरान आपको कदम कदम पर ठहरने के लिए अच्छी अच्छी जगहें सस्ते और महंगे दोनों तरह के कीमतों में मिल जाती है।

चार धाम की यात्रा तक कैसे पहुंचे?

भारत में बड़ी चार धाम यात्रा एवं छोटी चार धाम यात्रा के लिए , आप बस , ट्रेन एवं हवाई किसी भी माध्यम से आसानी से जा सकते हैं। यह आपके बजट और आपके शौक पर ही जाता है की आप किस तरह की यात्रा करना पसंद करते हैं।

चार धाम की यात्रा के लिए बस , ट्रेन एवं हवाई जहाज में से यात्रियों के लिए सबसे अच्छा , सुविधाजनक और आरामदायक यातायात का साधन कौन सा है। इसके बारे में आगे के लेख में विस्तार से जानेंगे –

चार धाम की यात्रा के लिए सड़क मार्ग

जैसे की आपको पहले ही हिन्दू धर्म में होने वाले पावन चार धाम की यात्रा के बारे में सारी जानकारी मिल चुकी है। शंकराचार्य के द्वारा चार धाम की यात्रा को मोक्ष का द्वार बताया गया है।

जैसा की आप पहले ही जान चुके हैं चार धाम में आपको दो तरह की यात्रा करनी होती है एक बड़ी चार धाम यात्रा एवं दूसरी छोटी चार धाम यात्रा।

बड़ी चार धाम की यात्रा में आपको अलग अगल राज्यों के मंदिरों के दर्शन करने होते हैं , बड़ी चार धाम यात्रा में आपको पहले यात्रा गुजरात के द्वारिका से शुरू करनी होती है उसके बाद आपको कश्मीर के बद्रीनाथ में जाना होता है , फिर आपको उड़ीसा के पूरी मंदिर के दर्शन करने होते हैं और अंत में आपको दक्षिण के रामेश्वरम में यात्रा को समाप्त करना होता है। अगर आप बड़ी चार धाम यात्रा को सड़क मार्ग के द्वारा पूरा करना चाहते हैं तो यह संभव नहीं है।

अगर आप सड़क मार्ग के द्वारा यात्रा करना चाहते हैं तो आपको छोटी चार धाम की यात्रा आपके लिए सर्वोत्तम विकल्प है। भारत के सारे प्रमुख शहरों से उत्तराखंड के लिए आपको बस की सुविधा आपको आसानी से मिल जाती है। छोटी चार धाम की यात्रा सड़क मार्ग के द्वारा करने के लिए आपको ऋषिकेश , दिल्ली और हरिद्वार से बस मिल जाएगी।

उत्तराखंड का सबसे नजदीकी शहर हरिद्वार है जहाँ से आप चार धाम की यात्रा की शुरुवात कर सकते हैं। जो की यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक है।

यदि आप सड़क मार्ग से हरिद्वार से छोटी चार धाम की यात्रा का शुरुवात करते हैं तो इस दौरान आपको निम्नलिखित स्थानों की यात्रा करने का मौका मिलता है –

हरिद्वार से ऋषिकेश से बरकोट से जानकी पट्टी से यमुनोत्री से उत्तरकाशी से हरसिल से गंगोत्री घनसाली से अगस्तमुनि से गुफ्तकाशी से केदारनाथ से चमोली गोपेश्वर से गोविन्द घाट से बद्रीनाथ से जोशीमठ से ऋषिकेश से वापिस हरिद्वार।

हवाई मार्ग से चार धाम की यात्रा

अगर आप भव्य चार धाम की यात्रा के बारे में सोच रहे हैं तो इसके लिए हवाई मार्ग ही आपके लिए सबसे अच्छा विक्लप है। क्योंकि अगर आप बड़ी चार धाम की यात्रा सड़क मार्ग के द्वारा करना चाहते हैं तो यह आपके लिए सम्भव नहीं है। क्योंकि इस यात्रा के दौरान आपको अलग अगल राज्यों का भर्मण करना होता है। जो की सड़क मार्ग के माध्यम से काफी मुश्किल है।

बड़ी चार धाम की यात्रा करने के लिए आपके लिए सर्वोत्तम विकल्प हवाई मार्ग है। जैसा की आपको पता है की बड़ी चार धाम की यात्रा गुजरात के द्वारिका से शुरू होती है। इसके लिए आपको अपने शहर के नजदीकी एयरपोर्ट से द्वारिका के लिए सबसे पहले टिकट बुक करनी होती है। उसके बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ , फिर उड़ीसा के पूरी में दर्शन के लिए जाना होता है और अंत में आपको दक्षिण भारत के रामेश्वरम में जाना होता है। इन सारे स्थानों में आपको जाने के लिए आपको हवाई मार्ग का ही चयन करना होता है। बारी बारी से हर शहर के हवाई अड्डा में जाएँ और फिर आगे की यात्रा को हवाई जहाज के माध्यम से ही जारी रखें।

अगर आप छोटी चार धाम की यात्रा के लिए जा रहे हैं तो आपके जानकरी के लिए बता दें की यहाँ आपको हर मंदिर तक जाने के लिए आपको हेलीकाप्टर की सेवा मिल जाती है। हेलीकॉप्टर की सेवा आपको सबसे नजदीक गंगोत्री से 6 किलोमीटर की दुरी में और यमुनोत्री से 25 किलोमीटर की दुरी में देखने को मिलता है।

छोटी चार धाम की यात्रा करने के लिए आपको यहाँ हेलीकाप्टर की सुविधा मिल जाती है जो आपको बारी बारी से चारों गंगोत्री ,यमुनोत्री , बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा धाम की यात्रा कराती है। छोटी चार धाम की हेलीकॉप्टर यात्रा देहरादून से शुरू होती है और देहरादून में ही आके समाप्त होती है।

हेलीकॉप्टर सेवा की आनंद लेने के सबसे पहले आपको इसके लिए टिकट बुक करनी होती है। इसके लिए आपको ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की व्यवस्था मिल जाती है। जो भी आपके लिए सुवधा जनक हो उसके अनुसार टिकट बुक कर सकते हैं।

रेल से चार धाम की यात्रा

अगर आप रेलवे के माध्यम से ही चार धाम की यात्रा करने की ठान ली है तो इसके लिए आपको थोड़ी बहुत दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है। छोटी चार धाम की यात्रा के लिए आपको उत्तराखंड के चार अलग अलग जगहों में जाने की जरूरत होती है। वहाँ जाने के लिए आपको लोकल ट्रेन का इस्तेमाल करना होता है। अगर आप दिल्ली से चार धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो इसके लिए लोकल ट्रेन आपके लिए सबसे अच्छा विक्लप है। मंदिर तक जाने के लिए आगे की यात्रा आप बस एवं टैक्सी से कर सकते हैं।

विभिन्न स्थानों से केदारनाथ की दूरी

  • चंडीगढ़ – 387 किलोमीटर
  • नागपुर – 1421 किलोमीटर
  • दिल्ली – 458 किलोमीटर
  • बंगलोरे – 2484 किलोमीटर

विभिन्न स्थानों से बद्रीनाथ की दूरी

  • बंगलौर – 2495 किलोमीटर
  • कोटद्वार – 327 किलोमीटर
  • जयपुर – 801 किलोमीटर
  • फूलों की घाटी – 70 किलोमीटर
  • दिल्ली – 525 किलोमीटर
  • ऋषिकेश – 301 किलोमीटर

विभिन्न स्थानों से यमुनोत्री की दूरी

  • लखनऊ – 741 किलोमीटर
  • गाजियाबाद – 390 किलोमीटर
  • दिल्ली – 425 किलोमीटर
  • चंडीगड़ – 289 कि. मी
  • मेरठ – 345 कि. मी
  • गुड़गांव – 454 किमी
  • जयपुर – 705 किमी
  • शिमला – 268 किमी
  • नोएडा – 448 किलोमीटर

विभिन्न स्थानों से गंगोत्री की दूरी

  • ऋषिकेश – 249 कि.मी
  • उत्तराखंड – 97 कि.मी
  • तिहारी – 167 कि.मी
  • देहरादून – 300 कि.मी
  • धरासु – 250 कि.मी
  • मसूरी – 250 कि.मी
  • यमुनोत्री – 232 कि.मी

चार धाम पर जाने के लिए सही समय

जैसे की आपको यह पहले से ही पता है की छोटी चार धाम की यात्रा आपको उत्तराखंड में ही करना होता है। इन चारों धामों की यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं के पास सबसे अच्छा समय कौन सा होता है इसकी पूरी जानकारी आपको नीचे के पैराग्राफ में मिल जाएगी –

यमुनोत्री के लिए

छोटी चार धाम की यात्रा में आपको यात्रा की शुरुवात यमुनोत्री से करनी होती है , जिसमे यमुना नदी को यमुना माता के रूप में पूजा अर्चना की जाती है। हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथो के अनुसार यमुना को सूर्य की बेटी और यमराज की बहन कहा जाता है।

Yamnotri
Yamnotri

कहा जाता है की यदि आप यमुना में स्नान करके मंदिर में पूजा आरती करते हैं तो इससे आप पर यमराज की कृपा हमेशा बनी रहती है। इसलिए चार धाम की यात्रा की शुरुवात यमुनोत्री से ही की जाती है।

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इस मंदिर की सबसे बड़ी खासीयत यह है की यहाँ यह मंदिर चारों तरफ से गर्म फुहारों से घिरे होने के कारण ठंडे पहाड़ो में भी आपको गर्म कुंड मिल जायेंगे , जहाँ पर स्न्नान करना आपके लिए सचमुच काफी ज्यादा आनंददायक होने वाला है और यह आपके लिए काफी यादगार भी होने वाला है।

जैसा की आपको उत्तराखंड की सर्दी और ठंडी के बारे में सारी जानकारी पहले से पता है। उत्तराखंड हिमालय के किनारे होने के कारण यहाँ पर काफी ज्यादा ठंडी पड़ती है। इसलिए ठंडी के समय में पर्यटकों के लिए इस मंदिर को बंद रखा जाता है। इस मंदिर के खुलने का समय गर्मियों में 3 मई से 24 अक्टूबर तक होता है। इन दिनों मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन का समय सुबह 7:00 बजे से 1:00 तक होता है और फिर शाम के 4:00 बजे से 8:00 तक खुला रहता है।

गंगोत्री धाम

चार धाम में यात्रा के दौरान यहाँ का दूसरा धाम गंगौत्री है जहाँ माता गंगा की पूजा की जाती है। पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार गंगोत्री वह स्थान है जहाँ पर माता गंगा स्वर्ग से धरती पर आयी थी। माता गंगा के तेज धाराओं को भगवान शिव जी ने अपनी जाटवों में समेटा था। फिर इसे धरती पर आने दिया था।

Gangotri
Gangotri

हिन्दुओं के लिए यह धाम भी काफी पवित्र माना जाता है इस धाम पर आना भी हिन्दुओं के लिए काफी पुण्य का काम होता है। अपने पुरे जीवन कल में हर हिन्दुओं की यहाँ आने ली काफी तीव्र इच्छा होती है।

ठण्ड के समय में इस मदिर को भी बंद कर दिया जाता है। इस मंदिर के खुलने का समय 3 मई से 25 अक्टूबर होता है। इन दिनों यह मंदिर पर्यटकों के लिए सुबह 6:00 बजे से शाम को 3:00 बजे तक और शाम को 6:00 बजे से रात्री 8:00 बजे तक यह मंदिर खुला रहता है।

अगर आप घूमने फिरने के शोक रखते हैं तो इसके आसपास जलमग्न शिव, गोमुख सूर्य कुंड और भागीरथी शीला जैसे कुछ खास दर्शनीय स्थल देखने को मिल जाते हैं।

केदारनाथ

छोटी चार धाम की यात्रा में केदारनाथ धाम को सबसे प्रमुख धाम माना जाता है।इसमें भगवान शिव की पूजा की जाती है यह मदिर रुद्रप्राग के जिले में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग में से एक है।

Kedarnath Dham
Kedarnath Dham

यह मंदिर भी अन्य मंदिरों के तरह ही 3 मई से 25 अक्टूबर के बीच ही खुला रहता है। दिन में मंदिर के खुलने का समय सुबह 4:00 से शाम 7:00 बजे तक है , 3 : 00 बजे से 5: 00 के बीच कुछ समय के लिए इस मंदिर को बंद कर दिया जाता है।

बद्रीनाथ

छोटी चार धाम की यात्रा बद्रीनाथ पर समाप्त होती है यह धाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और इसी जगह पर चारों धाम की यात्रा बताने वाले शंकराचार्य को इसी जगह में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

Badrinath
Badrinath

इस धाम की खास विशेषता यह है की इस जगह पर आपको यहाँ जीवन मरण के चक्र से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है और आपको मोक्ष प्राप्ति के मार्ग मिल जाते हैं।

यह मंदिर पर्यटकों के लिए 8 मई से 20 नवंबर तक खुला रहता है। दिन के समय में मंदिर के खुलने का समय 4:00 बजे 7:00 बजे तक होता है।

चार धाम की यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज

अगर आपने चार धाम की यात्रा करने के बारे में पूरी तरीके से ठान लिया है तो आपको यात्रा शुरू करने से पहले इस बात की जानकारी रखने अति आवश्यक है की वहाँ जाने के लिए प्रत्येक श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत होती है। इसके लिए आपको कुछ खास दस्तावेजों को जमा करना होता है . जिन्हें आपको पुलिस को दिखाना होता है। इसके बाद आपके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

  • वोटर आईडी कार्ड
  • पेन कार्ड
  • अधार कार्ड
  • ड्राविंग लाइसेंस

चार धाम यात्रा रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कैसे करें?

चार धाम की यात्रा करने से पहले यात्रियों को चार धाम के लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है। आप रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन किसी भी माध्यम से कर सकते हैं। यहाँ हम चार धाम की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बारे में बात करेंगे –

चार धाम रजिस्ट्रेशन 2023 – आप ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों ही तरीके से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। नीचे के स्टेप्स को फ्लो करके आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को काफी अच्छी तरीके से सिख सकते हैं , तो चलिए शुरू करते हैं –

  • सबसे पहले आपको उत्तराखंड के ऑफिसियल वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in में आपको विजिट करना होता है।
  • वेबसाइट के होम पेज पर पहुँचते आपको दाहिने तरफ Register एवं Login का विकल्प देखने को मिलता है।
  • अगर आप पहली बार इस वेबसाइट में विजिट कर रहे हैं तो आपको यहाँ Register के विकल्प में क्लिक करना होता है।
  • रजिस्टार के ऑप्शन में क्लिक करते ही आपके स्क्रीन पर का रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलकर सामने आता है .
  • इस रजिस्ट्रेशन फार्म में आपको अपना नाम , मोबाइल नंबर जैसी जरुरी जानकरी डालनी होती है।
  • फिर आपको यहाँ अपना पासवर्ड डालना होता है फिर कन्फर्म पासवर्ड में इसी पासवर्ड को Re – enter करना होता है।
  • इसके बाद सारी जानकारी को भरने के बाद आप यहाँ ”SignUp” के बटन पर क्लिक करना होता है।
  • इस तरह से एक बार अकाउंट बनाने के बाद दुबारा आपको इसी पेज पे आने का जरूरत है।
  • अब फिर से Login के पेज में आना होता है। अपना यूजनेम मोबाइल नंबर डाल कर आगे की प्रक्रिया करना होता है।
  • आगे की प्रक्रिया में कैप्चा कोड डालकर Sign Up पर क्लिक करना होता है।
  • आपके Login करते हैं 2023 की रजिस्ट्रेशन फार्म खुल कर सामने आ जाती है। इस पेज में आपको कुछ जरुरी जानकारी भरनी होती है उसके बाद जरुरी दस्तावेज को ऑनलाइन ही उपलोड करना होता है।
  • इसके बाद आपको रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करना होता है। इस तरह से आपको रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके बाद आप इसकी इलेक्टॉनिक कॉपी को डाउनलोड कर अपनी यात्रा की तैयारी कर सकते हैं।

चार धाम यात्रा रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन कैसे करें?

यदि किसी कारण से आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फार्म को भरने के लिए सक्षम नहीं हैं तो आप ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

यहाँ उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में आप पंजीकरण केंद्र देखने को मिलते हैं जहाँ आप आसानी से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूर्ण कर सकते हैं। उत्तराखंड के प्रमुख राज्य और वहां स्थित पंजीकरण केंद्र निम्नलिखित हैं –

  • रुद्रप्रयाग में पंजीकरण केंद्र केदारनाथ , सोनप्रयाग , फट्टा , गोरीकुंड में देखने को मिलता है।
  • उत्तरकाशी का पंजीकरण केंद्र आपको जन की चट्टी , हिना , यमुनोत्री , गंगोत्री , बड़कोट , डोबट्टा मिल जाता है।
  • चमोली जिले में पंजीकरण केंद्र आपको बद्रीनाथ, गोविन्द घाट , जोशीमठ , हेमकुंड साहिब , पाखी में देखने को मिलते हैं।
  • देहरदून जिले में RTO , ऋषिकेश, गुरुद्वारा , ISBT में श्रद्धलुओं के लिए पंजीकरण केंंद्र की व्यवस्था की गयी है।
  • हरिद्वार जिले में राही होटल ,रेलवे स्टेशन में श्रद्धलुओं के लिए पंजीकरण केंद्र की व्यवस्था की गयी है।

चार धाम यात्रा में कितना खर्चा आता है?

चार धाम की यात्रा के दौरन यदि आप अपने शहरों से दिल्ली , ऋषिकेश एवं हरिद्वार पहुँच चुके हैं तो आगे की यात्रा करने के लिए आपको बस ट्रेन एवं हेलीकॉप्टर की सहायता लेनी होती है।

यदि आप ऋषिकेश से अपनी यात्रा की शुरुवात कर रहे हैं तो आपको एक धाम की यात्रा करने के लिए 1300 रूपये से 1400 रूपये खर्च करने होते हैं और उसके बाद यदि आप 2 धाम की यात्रा कर रहे हैं तो इसके लिए आपको 1800 से 2000 खर्च करने होते हैं।

आगे आप तीन धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 2500 से 2800 खर्च करने होते हैं। चारों धाम की यात्रा आप आप 4000 में आसानी से पूरी कर सकते हैं।

अगर आप थोड़े शौकिया व्यक्ति हैं और अपनी यात्रा को और भी आरामदायक और सुविधाजनक बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कुछ ज्यादा खर्चे करने होते हैं। 5000 से 5500 खर्च करने पर ऋषिकेश से आपको एसी एवं स्लीपर बस मिल जाती है जसके मदद से आप चार धाम की यात्रा आप काफी सुविधाजनक तरीके से पूरी कर सकते हैं। अगर आप अकेले हैं तो इतने खर्चे में इत्मीनान से चार धाम की यात्रा को पूरी कर सकते हैं लेकिन यदि आप अपने परिवार के साथ आ रहे हैं तो इससे कही ज्यादा खर्च आपको अपने परिवार के लिए उठाना होता है।

इसके आलावा अगर आपका बजट कम है और कम खर्चों चार धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो रुकने एवं ठरहने के लिए आप काफी काम ख़र्चों आश्रम एवं धर्मशाला का इस्तेमाल कर सकते हैं। काफी कम पैसों में 24 घंटे का जुगाड़ हो जाता है।

आप 100 से 500 रूपये का खर्च करके अपने 24 घंटे रहने का बंदोबस्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप अलग अलग सराय में भी रुकने का बंदोवस्त कर सकते हैं। जहाँ आपको एक बेड के लिए 75 से 700 रूपये खर्च करने की जरूरत होती है।

चार धाम की यात्रा में यात्रियों को रुकने के लिए , खाने पीने के लिए हर तरह की व्यवस्था यहाँ आपको देखने को मिल जाती है। 50 से 100 रूपये खर्च करके आपको का समय का भोजन मिल जाता है।

उत्तराखण्ड के चारों धाम ऊँचे ऊँचे पहाड़ों में ही स्थित है इसलिए यहाँ खाने पीने की चीजों की कीमते बाकि जगहों की तुलना में काफी ज्यादा होती है।

आप अकेले ही इतने खर्चे में बड़े इत्मीनान से चार धाम की यात्रा कर सकते हैं लेकिन यदि आप अपने परिवार के साथ आ रहे हैं तो इसके लिए आपको इससे कहीं ज्यादा खर्चे करने की जरूरत पड़ती है।

चार धाम की यात्रा में खाने के लिए क्या-क्या फेमस है?

चार धाम की यात्रा के दौरान आपको भारत के अलग अगल राज्यों में जाना होता है इस दौरन आपको कुछ खास व्यंजन का स्वाद चखने को नहीं मिलता है बल्कि अलग अलग राज्यों के भोजन का स्वाद लेने को मौका मिलता है।

चार धाम की यात्रा की यात्रा की शुरुवात आपको सबसे पहले गुजरात के द्वारिका से करना होता है। यहाँ आपको यहाँ के स्थानीय भोजन का स्वाद लेने का मौका मिलता है। उसके बाद दूसरे धाम के लिए आपको उत्तराखंड के बद्रीनाथ में जाना होता है। उत्तराखंड अपने काजू और अखरोट के लिए काफी ज्यादा प्रशिद्ध है। यहाँ आपको एक से एक ड्राई फ्रूट से बने स्वादिष्ट व्यंजन को चखने का मौका मिलता है।

इसी तरह से जब आप उड़ीसा के पूरी एवं तमिलनाडु के रामेश्वरम में जाते हैं तो यहाँ के स्थनीय भोजन का भी स्वाद चखने का मौका मिलता है।

चार धाम की यात्रा करते वक्त साथ में क्या रखें?

चार धाम की यात्रा करने से पहले आपको अच्छी तरीके से तैयारी कर लेनी चाहिए। नीचे काफी अच्छी तरीके से बता दिया गया है की यात्रा के दौरान आपको किन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • चार धाम की यात्रा करने से पहले आपको अपने फिटनेस पर काफी ज्यादा ध्यान देना होता है। यात्रा शुरू करने से पहले आपको अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ को काफी मजबूत बनाने की जरूरत होती है। क्योंकि यात्रा के दौरान आपको 14000 फीट की ऊंचाई पर ट्रैकिंग करनी होती है। ऐसे में यदि आप शारीरिक रूप से कमजोर हैं तो आपको काफी कठनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यात्रा की शुरुवात करने से पहले आपको एक बार डॉक्टर से अवश्य मिल लेना चाहिए।
  • अगर आप एक अच्छा स्पोर्ट्स मैन हैं तो आपके लिए यह यात्रा काफी मजेदार साबित होने वाला है अन्यथा आपको यात्रा शुरू करने से 2 से 3 महीने पहले अपनी फिटनेस पर काफी ज्यादा मेहनत करना होता है। ताकि आपका शरीर यात्रा के लायक बन जाये।
  • चार धाम की यात्रा काफी मुश्किलों भरा होता है और बहुत ही लंबी रास्ता का सामना करना होता है। इसलिए भूल से भी कभी भी किसी भी शार्टकट रस्ते का चुनाव न करें इससे आपके और भी कठिनाइयों का सामना करना पढ़ सकता है।
  • क्योंकि उत्तराखंड एक ठंडी जलवायु वाला प्रदेश है। यहाँ सालों भर ठण्ड रहती है। इसलिए जब कभी भी यहाँ आये तो यहाँ आने से पहले आपको गर्म कपडे जैसे की स्वेटर जाकेट , मफलर और कंबल अपने साथ रखना बिलकुल भी न भूलें। इन सब के आलावा बारिश में इस्तेमाल होने वाले रैनकोट एवं छाता को भी अपने साथ रखना कभी भी न भूलें , क्योंकि यहाँ आये दिन बरसात की संभावना बानी रहती है। साथ ही ट्रेकिंग में इस्तेमाल की जाने वाली सारी चीजों को जैसे स्लीपिंग बैग , टार्च कंबल एवं वाटर प्रूफ जूते रखना अति अनिवार्य है।
  • यूँ तो आपको चार धाम की यात्रा करने से पहले अपने फिटनेस को काफी ज्यादा मजबूत बनाना होता है। फिर भी यदि आपको यात्रा के दौरान कही पर भी थकान महसूस होता है और इसके लिए आपको टटू या घोड़े गाड़ी को किराये में लेने की जरूरत पड़े तो इसके लिए हमेशा रजिस्टर्ड कुली एवं टटू का ही इस्तेमाल करें , जिससे आपको ठगे जाने की कोई भी संभावना नहीं होती है।
  • औरतों को पहनावे के दौरान इसका विशेष ध्यान रखना होता है। यात्रा के दौरान औरतों को साड़ी से बिलकुल परहेज करने की जरूरत है। यात्रा के दौरान औरतों को हमेशा सलवार शट या ट्राउजर का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे उसे यात्रा के दौरान किसी भी तरह के परेशानी कला सामना करने का जरूरत न पड़े।
  • अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल किये जाने वाले दवाइयों जैसे सर्दी, खांसी और पेट दर्द में काम आने वाली दवाइयों को अपने साथ रखना अति आवश्यक है।

निष्कर्ष

इस लेख में आपको चार धाम की यात्रा , जाने का सही समय और खर्चा के बारे में सारी जानकारी आपको विस्तार से जानने को मिलती है। इस लेख के माध्यम से आप छोटी चार धाम की यात्रा तथा बड़ी चार धाम की यात्रा , चार धाम की यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में आसानी से सारी जानकारी मिल जाती है।

उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा दिया गया। यह जानकारी आपको लिए काफी मददगार साबित हुआ होगा। अगर यह आपके लिए सच मुच मददगर साबित हुआ हो तो इसे अपने मित्रों के साथ शेयर करना कभी भी न भूलें।

साथ ही चार धाम की यात्रा से संबन्धित अगर किसी भी तरह के सवाल या सुझाव आपके मन में है तो कमेंट सेक्शन में अपने विचार को रखना बिलकुल भी न भूलें।

FAQ

क्या मैं बिना रजिस्ट्रेशन के बद्रीनाथ जा सकता हूँ ?

नहीं आप बिना रजिस्ट्रशन के बद्रीनाथ की यात्रा कभी भी नहीं कर सकते हैं।

केदारनाथ के लिए रजिस्ट्रेशन फीस कितनी है ?

केदारनाथ के लिए पंजीकरण बिलकुल ही मुफ्त है।

चार धाम की यात्रा आप कितने दिनों में पूरी कर सकते हैं ?

चार धाम की यात्रा को आप 17 दिनों में पूरा कर सकते हैं।

चार धाम की यात्रा के लिए आपको किस तरह के दस्तवेजों की जरूरत होती है ?

चार धाम की यात्रा के लिए आधार कार्ड ,पेन कार्ड , वोटर आईडी कार्ड फोटो और हेल्थ सर्टिफिकेट का होना अति अनिवार्य है।

चार धाम की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय कब होता है ?

चार धाम की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून एवं सितम्बर से अक्टूबर के बीच माना जाता है। इन महीनों में ही यहाँ के कपाट खोले जाते हैं।

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