श्री खाटू श्याम मंदिर में घूमने की जगह एवं यात्रा की पूरी जानकारी

Khatu Shyam Mandir ki Jankari : यदि आप खाटू  श्याम मंदिर की यात्रा करना चाहते हैं  और  यात्रा का मन बना रहे हैं। तो आप  अभी बिलकुल भी सही जगह पे हैं।  इस लेख में आपको सारे सावलें के जवाब आसानी से मिल जायेंगे।  जैसे की खाटू श्याम मंदिर कहाँ है ? खाटू श्याम मंदिर कहा है ?  खाटू श्याम मंदिर के दर्शन का समय पूजा करने का तरीका और आसपास घूमने की जगह।    

खाटू श्याम मंदिर भारत के प्रशिद्ध मंदिरों में से एक है जो की भगवन कृष्ण के  समर्पण में बनाया  गया है।  यह राजस्थान राज के छोटे से जिले से 65  किलोमीटर दुरी पर बसा हुआ है।  यहाँ 90 लाख से अधिक भक्त प्रत्येक साल दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर भगवन कृष्ण  और बर्बरीक के लिए प्रशिद्ध है , श्रद्धालुओं का मानना है की यहाँ सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। 

खाटू श्याम मंदिर (khatu shyam ji mandir) और उससे जुडी हर तरह की जानकारी इस लेख  में आपको आसानी से मिलेगी। बस आप यहाँ शुरू से अंत तक बने रहें।  

खाटू श्याम मंदिर में दर्शन और यात्रा की पूरी जानकारी
Source : travelershankar.com

Contents

 खाटू श्याम मंदिर का इतिहास

खाटू श्याम मंदिर का इतिहास महाभारत काल के कुरुक्षेत्र से ज़ुरा हुआ है।  यदि आप महाभारत के बारे में थोड़ा बहुत भी जानकारी रखते है तो आपको बर्बरीक के बारे में जरूर पता होना चाहिए।   

जब पांडव वनवास में थे , तब भीम ने हिडिम्बा से मिल कर एक संतान को जन्म दिया था जिसने बाद में बर्बरीक को जन्म दिया।  इन दोनों को उनके वीरता और कौशल के कारन जाना जाता था।  

बर्बरीक ने यद्ध कला श्री कृष्ण और अपने माता से सीखा था  और भगवान श्री शिव को खुश कर के तीन बाण भी वरदान में प्राप्त  किये थे। 

भागवान शिव के दिए बाणो से बर्बरक तीनो लोक में विजय हासिल कर सकता था। जब कौरव और पांडवों के बीच युद्ध हो  रहा था तो युद्ध लिए वो युद्ध की मैदान तरफ जा रहे थे। श्री कृष्ण को पता था यदि बर्बरीक युद्ध में भाग लेगा तो पांडवों का जीत संभव हो जायेगा।  

बर्बरीक को रोकने लिए भगवन कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश बनाकर उससे पूछा कि वह कौन है और  क्या चाहते है ? ऐसे  में बर्बरीक ने उतर दिया वह एक दानी है और एक  ही बाण में  महाभारत का युद्ध समाप्त कर देगा।   ऐसे में श्री कृष्ण ने उनकी कौशल देखनी चाही तो बर्बरीक ने अपने एक ही बाण से पीपल के पेड़ के सरे पते छेद कर दिए।   

भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उसे यद्ध करने से रोकने के लिए उस से उसका सीस दान में मांग लिए , बर्बरीक को समझते देर नहीं लगी की दान मांगने  वाला कोई और नहीं  भगवन श्री कृष्ण हैं।  युद्ध में आपना शिर दान देने के बाद उन्होंने पुरा युध्द देखने की इच्छा जताई और श्री कृष्ण ने यह स्वीकार कर लिया। उसके सिर को पहाड़ की एक चोटी  पर रख दिया। 

युद्ध खत्म होते ही पांडव आपस में लड़ने लगे की जीत  का श्रेय खुद  लेने लगे, भगवन श्री कृष्ण ने कहा ऐसे में सचाई सिर्फ बर्बरीक ही बता सकता  है। तो फिर बर्बरीक के कटे शिर  ने सचाई बताया युध्द के दौरान सारा काम श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र से होता था , युद्ध में श्री कृष्ण का सुदर्शन चल रहा था और शवों के ढेर लग रहे थे।  और द्रोपदी काली  चंडिका के रूप में शवों का खून पी रही थी। भगवान  श्री कृष्ण इससे खुश होकर उन्हें यह वरदान दिया की कलयुग में तुमहें मेरे खाटू शयम के नाम से  पूजा जायेगा।  तुम्हारे पूजा करने वालों का सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ण हो जायेगा उसे धर्म  अर्थ और मोक्ष की प्रप्ति होगी।  

खाटू श्याम  मंदिर का निर्माण

खाटू श्याम मंदिर का निर्माण 1027 ई. में रूप सिंह चौहान और उसकी पत्नी नर्मदा कवर द्वारा बनवाया गया था , बाद में इसे भक्तों के द्वारा मॉडिफाई किया गया।  1720 ई. में  दीवान अभय सिंह  ने इसका पुनिर्माण करवाया था। इसी समय गर्भगृह को बनवाया गया और प्रतिमा की  भी स्थापना  की गयी।    

खाटू श्याम मंदिर में आपको समृध्द वास्तुकला देखने को मिलेगी।  मंदिर को टाइल्स पत्थर चुने के मोर्टार और इसी तरह के कई दुर्लभ पत्थरों के द्वारा बनया  गाया है।  

खाटू श्याम मंदिर के केंद्र में आपको पार्थना कक्ष मिलेगा जिसे  जगमोहन के नाम से जाना जाता है। 

खाटू श्याम मंदिर के दिवारों पर पौराणिक  प्राणियों का चित्रण देखने को मिलेगा।  मंदिर का  प्रवेश और निकाष  द्वार आपको  संगमरमर का देखने को मिलेगा।  मंदिर के अंदर आलू सिंह नाम के के व्यक्ति की समाधी स्थल भी देखने को मिलेगी।  बाबा खाटू श्याम मंदिर की प्रतिमा की स्थापना मंदिर के गर्भ गृह में किया गया था। 

खाटू श्याम मंदिर की दीवारों को सोने की चादरों से सुसज्जित किया गया है।  मंदिर के आँगन में आपको एक सूंदर सा बगीचा भी देखने को मिलेगा , जो की शाम के बगीचा के नाम से प्रशिद्ध है।  

पूजा के दौरान  जो भी फूल तोड़ जाते हैं उसे इस बगीचा से ही लिया जाता है।  मंदिर के परिसर में एक कुंड भी है जिसे श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है।  इसी कुंड से भगवान खाटू श्याम का सर मिला था इसलिए इसे श्याम कुंड के नाम से भी जाना जाता है।  

कहा जाता है यहाँ डुबकी लगाने वाले श्रर्द्धालु पवित्र हो जाते हैं।  

खाटू श्याम मंदिर कहा है 

भगवान खाटू श्याम  मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले के रीगस शहर में बसा हुआ है।  आप अपनी इच्छा अनुसार किसी भी माधयम से आज सकते है।  जैसे कि बस,  ट्रैन,  कार  या फिर हवाई जहाज।  

खाटू श्याम मंदिर जाने का समय 

क्योंकि खाटू श्याम मंदिर राज्यस्थान में है जहा गरमी के समय जाना बिलकुल भी सही नहीं रहेगा आपका  सारा ट्रेवलिंग का मजा फीका हो जायेगा।  इसलिए  आप के लिए अक्टुबर से मार्च का महीना सही रहेगा जो की सर्दियों का महीना होता है और सुहावना होता है।  

गर्मी के समय यहाँ का तापमान काफी बढ़ जाता है जो की असहनीय है।  इसी कारण अक्टूबर से मार्च के महीनो मे श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है , इस समय का मौसम काफी सुहाना रहता है।  

खाटू श्याम जाने का माध्यम  

खाटू श्याम मंदिर आप किसी भी माधयम से जा सकते है वो आपके इच्छा और आपके बजट पर निर्भर करता है। आप तीनो में से किसी भी माधयम को चुन सकते हैं। बस, ट्रेन और हवाई जहाज।

बस या ट्रेन द्वारा

अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो सबसे  पहले जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे।  यदि आपके शहर  से कोई डायरेक्ट ट्रेन जयपुर के लिए नहीं है तो फिर आप पहले दिल्ली के लिए ट्रैन लीजिए और फिर दिल्ली से आसानी से आपको जयपुर के लिए ट्रेन मिल जायेगा।  

उसके बाद जयपुर स्टेशन  से 90 किलोमीटर की दूरी पर खाटू श्याम मंदिर ( बर्बरीक मंदिर) स्थित है जिसके लिए आपको रेलवे स्टेशन या सिंधी बस स्टैंड से बस या  टैक्सी आसानी से मिल जाएगी।  

हवाई मार्ग से  

आपको अपने शहर से जयपुर के लिए आसानी से फ्लाइट मिल जाएगी और किसी कारण से आपके अपने शहर से  जयपुर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट न मिले तो आप दिल्ली के लिए फ्लाइट ले सकते हैं।  उसके बाद आपको आसानी से बस और टैक्सी मिल जाएगी।  जो आप ट्रेन के यात्रा के दौरान इस्तेमाल करते थे।   

खाटू श्याम मंदिर में रुकने की जगह और खाने की व्यवस्था

यदि आप खाटू श्याम मंदिर घूमने के लिए आ रहे है तो बिल्कुल निश्चिंत रहिये यहाँ आपको कोई रहने में दिक्कत नहीं आएगी। यहाँ आपको हर 10 से 20 कदम में आपको रहने के लिए धर्मशाला आसानी से मिल जाएगी जिसका हर रोज   का चार्ज सिर्फ 300 से 500  होता है।   

अगर आप  कीमती  और महंगे होटलों के शौकीन हैं तो आपको 800 से  1000 के बीच प्राइवेट होटल आसानी से मिल जाएंगे।  

अब यदि खाने की बात करें तो यहां मंदिर के आस पास  बहुत सारे रेस्टोरेंट और दुकान मिल जाएगी जहाँ आपको 100 से 150 रुपये तक में भरपेट भोजन मिल जायेगा। 

इसके अलावा मंदिर में हमेशा भंडारा चलता  रहता है , आप मंदिर के भंडारे के प्रसाद  से भी पेट बाहर सकते हैं। 

खाटू श्याम मंदिर की दर्शन की  विधि 

देश भर में खाटू श्याम के चाहने वालों की कमी  नहीं है।  लेकिन सबों को दर्शन की सही विधि का पता ही नहीं चल पता है आप दो तरीके से दर्शन कर सकते हैं।  एक तो वहाँ जाकर आफ लाइन , यहाँ आकर टिकट काउंटर से टिकट लेकर दर्शन  कर सकते हैं 

दूसरा इसके ऑफिसियल वेबसाइट shrishyamdarshan. in टिकट बुक करा कर।  यदि आप ऑनलाइन टिकटी बुक कराते हैं तो जिसमे आपको ऑफलाइन के तरह लाइन में खड़ा होकर प्रसहनी का सामना करना नहीं पड़ेगा। 

यदि आप बिना रजिस्ट्रेशन के खाटू श्याम मंदिर में जाते है तो भीड़ में  बहार खड़ा  होकर पूजा अर्चना   करना पड़ेगा।  इसलिए बेहतर होगा की आप पहले ही ऑनलाइन टिकट बुक करा लें।  

खाटू श्याम जाने से पहले  वैक्सीन करना  कभी न भूलें।  बरर्बरीक मंदिर में अंदर जाने से  पहले मास्क लगाना न भूले वरन 2हजार का फाइन देना होगा।  यदि आपकी आयु 18 वर्ष से कम है तो आप रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते है।  

खाटू श्याम मंदिर के अंदर कोई भी सामान ले जाना सख्त मना जिसे कैमरा फ़ोन यहाँ तक तक  आप प्रसाद  भी नहीं ले जा सकते हैं।  

इन सारे बातों को ध्यान में रखते हुवे आप ऑनलाइन टिकट आसानी से बुक करा सकते हैं इसके बाद  बिना किसी किचकिच के आप इत्मीनान से पूजा  अर्चना कर सकते हैं।  

बुकिंग से रिलेटेड सारी जानकारी आपको वेबसाईट में मिल जाएगी।  

खाटू श्याम मंदिर खुलने का समय 

खाटू श्याम मंदिर खुलने का समय अलग अलग सीजन में अलग होता है। सर्दियों में अलग और गर्मियों में अलग। 

सर्दियों में मंदिर खुलने का समय सुबह 5: 30 से 1 बजे और शाम को 4:30 से 9:30 तक रहता  है और गर्मियों में सुबह 4:30 से 9:30 तक मंदिर और शाम 4 बजे से 10 बजे तक मंदिर खुला रहता है।  

खाटू श्याम मंदिर में आरती का समय 

खाटू श्याम मंदिर में 5 टाइम आरती होती है जो इस प्रकार  सुबह 5 बजे मंगला आरती , 7 बजे धुप आरती, दोपहर 12:15 बजे भोग  आरती, 7:30 बजे संध्या आरती और रात्रि 10 बजे शयन आरती।   

खाटू श्याम में पूजा कैसे करें  

बहूत असर ऐसे भी भक्त ऐसे होते हैं जो पूजा करना तो चाहते  यहीं पर उन्हें पूजा करना बिलकुल भी नहीं आता है।  इन सारी  समस्यायों  का समाधान आप यहाँ से कर सकते हैं या फिर  सही विधि सिख सकते हैं। 

खाटू श्याम या फिर किसी भी भगवान  लिए  भक्तों का आस्था विश्वास और प्रेम से बड़ा कोई पूजा हो ही नहीं सकता।  फिर भी यदि आप विधिवत पूजा करना चाहते हैं तो वह इस प्रकार से है 

खाटू श्याम में पूजा की विधि 

खाटू श्याम मंदिर की मूर्ति या चित्र   बाजार से  खरीद   के लेते आएं  इसे अच्छी तरह से साफ करने के बाद  इसे किसी  साफ सुथरी जगह पर स्तापित करें।  

मूर्ति के अलावा आप को और भी सामान की जरुरत पड़ेगी जो की इस प्रकार है घी  का दीपक, कच्चा दुध प्रसाद।  

अब सबसे पहले खाटू श्याम के प्रतिमा को पंचामृत या कच्चे दूध से स्नान करना होता है। अच्छी तरह से स्नान कराने के बाद इसके मूर्ति को एक साफ कपड़े से अच्छी   तरह से पोंच लें।  इसके बाद इसे माल्यार्पण  कराना होता है।  इसके ठीक बाद घी का दीपक और अगरबत्ती जलाना न भूलें।

अगरबत्ती दिखाने के  बाद , पहले कच्चा दूध और फिर भोग की सामग्री को चराएँ।  भोग लगाने के बाद आरती  गायन करते हुए  पूजा करें। 

सबसे अंत में पूजा के द्वारान हुई गलती के लिए क्षमा मांगे। 

खाटू श्याम के मुख्य पर्व 

खाटू श्याम का सबसे बड़ा पर्व होता  है फाल्गुन मेला।  इस दौरान काफी सांख्या में भक्त गण निशान  यात्रा में भाग लेते है और मेला लगने की तिथि फागुन मैश के शुक्ल पक्ष के एकादशी (आमलकी आकादशी ) को होती है।  कहा जाता है इस समय सिर्फ खाटू श्याम के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्टों का निवारण हो जाता है और उनकी सारी  मनोकामना पूर्ण होती जाती है।  

खाटू श्याम में घूमने की जगह 

यदि आप खाटू श्याम घूमने आ रहे  है तो निराश होने की जरुरत नहीं है , यह यात्रा  आपके लिए कभी बोरिंग नहीं हो सकता है क्योकि यहाँ आपको घूमने के लिए लिए आपको  बहुत सारी जगहें मिलेगी जो की आपके मन को कभी भी ऊबने नहीं देगा।  

श्याम कुंड 

श्याम कुंड खाटू श्याम मंदिर
Image : Shyam kund

श्याम मंदिर के पास ही आपको श्याम कुंड भी देखने को मिलेगा।  मना जाता है की इसी कुंड में खाटू श्याम भगवान का सर मिला था जिस वजह से इसे खाटू श्याम कुंड के रूप में जाना जाता है।  इस कुंड की एक अलग ही विशेषता है  जो कोई भी इस कुंड में स्नान करता है तो उसके सरे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और बाद में फिर कभी इस तरह की कोई बीमारी नहीं होती है।  

श्री श्याम वाटिका 

Shri shyam Vatika mandir
Source : Shri shyam Vatika

यहाँ आपको खाटू श्याम के बगल में  श्याम वाटिका भी मिलेगी , जिसके पुष्प का  उपयोग श्री खाटू श्याम मंदिर में पूजा अचानक लिए किया जाता है।  यहाँ आपको विभिन्न प्रकार के पुष्प देखने लो मिलेंगे।  इस वाटिका में आपको आलू सिंह की प्रतिमा भी देखने को मिलेगी , जो की वाटिका के अंदर ही स्ठपित है।  

बालाजी महाराज सालासर

बालाजी महारज और खाटू श्याम की दुरी मात्र 110 किलोमीटर है।  यहाँ हनुमान जी के भक्तों के लिए पवित्र मंदिर है।  सालासर का यह पवित्र मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में बसा हुआ है।  

Balaji mandir khatu shyam mandir
Source : Mandir Salsar

यह मंदिर सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि पुर भारत में प्रशिद्ध है।  यहाँ प्रत्येक  साल चैत्र पूर्णिमा और अश्विन पूर्णिमा को बहुत बड़े मेले का आयोजन  होता है।  इस समय सालसार में 6 से 7 लाख लोंगो का भीड़ आपको यहाँ देखने को मिलेगा। 

यहाँ रहने और खाने के लिए कई धर्मशालायें और रेस्टोरेंट भी मिल जायेगा।  जिससे आपको किसी भी तरीके का कोई परेशानी नहीं होगी।   

हनुमान मंदिर 

हनुमान जी का यह मंदिर जयपुर से 43 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।  यह मंदिर ग्राम नांगल भरडा, तहशील चोमू में समोद पर्वत में बसा है।  

इस मंदिर और खाटू श्याम की मंदिर की दुरी 56 किलोमीटर है।  यह मंदिर सिर्फ राजस्थान में ही नहीं पुरे विश्व भर में प्रशिद्ध है। इस मंदिर के गर्भ गृह में भगवन हनुमान की 6 फ़ीट के मूर्ति स्तापित है।  साथ ही भगवान राम की भी मंदिर है।  

इस मंदिर का निर्माण वीर हनुमान ट्रस्ट और समोद द्वारा कराया गया है।  

लक्ष्मणगढ़ किला

laksman gad kila khatu shyam mandir
Source : Laxmangarh Fort kila

खाटूश्याम के आस पास आपको लक्मण गढ़ किला मिलेगा।  यह एक ऐतिहासिक इमारत है।  इतिहास प्रेमियों के लिए यह काफी सुप्रशिद्ध जगह है।  इस किले का निर्माण सीकर जिले से 30 किलोमीटर की दुरी पर लक्षमन गढ़ नमक गांव में कराया गया था।  इस किले को सीकर के रावराज लक्ष्मण सिंह ने 1802 ईस्वी में बनवाया था।  इसके ठीक 2 साल बाद इसने लक्समन गढ़ किले को बसाया था। लक्ष्मणगढ़ की सभी इतिहासिक इमारतें निजी  सम्पति है और यह झुनझुनवाला परिवार की सम्पति है।  

जीण माता मंदिर 

Source : Jeen Mata Mandir Khatu shyam mandir
Source : Jeen Mata Mandir

जीण माता को कुल देवी के रूप में माना  जाता है।  जीण माता अस्टभुजा वाली कुल देवी है इसे चमत्कारी माँ भी कहते हैं जो अपने भक्तों का दुःख दूर करती है।  कहा जाता है माता का मंदिर हजारों साल पुराना है।  जीन माता को शक्ति का अवतार भी कहा जाता है। 

 

एक बार दिल्ली के बादशाह औरेंजेब ने हर्ष पर्वत पे आक्रमण कर के मंदिरों और गुफ़ओं को नष्ट कर दिया।  इसके बाद मंदिरो की तरफ बड़ा तब फिर माता ने मधुमखियों का रूप धारण कर के उसके सैनिको पर हमला कर कर दिया।  मधुमखियों के डंको से परेशान हो कर घोड़ा और सैनिकों ने मैदान छोड़ दिया।  

तब औरेंजेब ने अपनी गलती मानकर माता के चरणों में अपना शीश झुकाया और माफ़ी भी मांगी , अंततः माता ने उसे माफ भी कर दिया। इस तरह से औरंगजेब ने माता की शक्ति को जाना।  और भौरों की रानी के नाम से शुध्द खालिश सोने की बानी मूर्ति भेंट किया।  

साथ ही “अखंड ज्योत भी जलाई”  और यह अखंड ज्योत सालों बाद आज भी जल रही है।  

नवरात्री के समय होने वाले वार्षिक मेले में भक्तों का भीड़ काफी संख्या में देखने को मिलती है।  

गोल्डन वाटर पार्क 

यदि आप गर्मी में खाटू श्याम आ रहे हैं या फिर आने की सोच रहे हैं तो गोल्डन वाटर पार्क को अपने लिस्ट में शामिल करना कभी न भूलें।  

क्योकि गर्मी के समय में वैसे भी राजस्थान का तापमान बहुत ही  ज्यादा रहता है।  गर्मी से रहत देने के लिये यह वाटर पार्क आपके लिए बिलकुल सही है।  

यह एक तरह का मनोरंजन पार्क भी है और बच्चों का पसंदीदा भी है। यह ३ लाख वर्ग फ़ीट में पहिला हुआ है।  ६-७ से पहले ही इसका निर्माण कराया गया था।  गर्मियों के समय में यहाँ बहुत ज्याद भीड़ देखने को मिलता है।  

यह वाटर पार्क सुबह 9:30 से 6:30 बजे तक खुला रहता है। यहाँ का टिकट शुल्क 300 रूपये का होता है और बच्चों के लिए मात्र 200 होता है।  

यह ३ साल पहले बच्चों के लिए निशुल्क था। 

यहाँ आपको पार्किंग पोशाक और लॉकर भी मिलेगा लेकिन उसके आपके अलग से अतिरिक्त शुल्क देना होगा।  

गणेश्वर धाम

खाटूश्याम से गुणेश्वर धाम की दुरी 75  किलोमीटर है।यहाँ आपको सभी देवी देवताओं की अलग अलग मूर्ति दखने को मिलेगी। 

 Ganeshwar Dham khatu shyam mandir
Source : Ganeshwar Dham

इस दहम के अंदर एक बड़ा सा कुंड है , जहाँ पहाड़ियों से पानी एकत्र होता है। माना जाता है की इस कुंड में एक बार स्नान कर लेने से पूरी जिंदिगी में फिर कभी चार्म रोग नहीं होता है।  

निष्कर्ष 

इस लेख में आपको श्री खाटू श्याम मंदिर में घूमने की जगह और यात्रा की पूरी जानकारी (Khatu Shyam Mandir ki Jankari) आसानी से मिल जाएगी। जैसे की मंदिर कहाँ स्थित है मंदिर में किस भगवान की पूजा होती है , कैसे पहुंचे , कहाँ रुके, मंदिर खुलने का समय , पूजा करने की विधि सारी जानकारी आपको इस लेख में मिल जाएगी।

अगर आपके लिए यह लेख आपकी यात्रा को मंगलमय बनता है या फिर आपको यह लेख पसंद आये तो फिर आप फिर इसे अपने जरुरतमंदों दोस्तों के साथ शेयर करना बिलकुल भी न भूलें।

इस लेख से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव है तो कमेंट में पूंछना न भूलें।

  

खाटू श्याम कोन से महीने जाना चाहिए ? 

वैसे खाटू श्याम के दर्शन के लिए 12 महीना में कभी भी आ जा सकते हैं।  लेकिन  अगस्त से मार्च तक का महीना काफी अच्छा रहता है दर्शन और घूमने के लिए। क्योकि इस समय मौसम काफी सुहावना होता है।  
गर्मियों में आपको काफी परेशानियों का सामना करना पर सकता है।  

खाटू श्याम अमंदिर कोन से दिन को बंद रहता है ? 

खाटू श्याम मंदिर रविववार को बंद रहता है।

खाटू श्याम मंदिर का दर्शन कितने बजे से लेकर कितने बजे तक होता है?

यहाँ आप दर्शन 4 चरणों में कर सकते हैं 
8से 9 बजे सुबह 
10 से 12 बजे दोपहर 
4 से 6 बजे संध्या 
8से 9:30 बजे रात्रि 

खाटू श्याम बाबा के पास एक दिन में कितने लोग जाते हैं ? 

रोजना 20 से 30 हजार लोग खाटूश्याम दर्शन के लिए लोग जाते हैं।  लेकिन किसी विशेष अवसरों में जिसे छुट्टियों में और एकादशियों में श्रद्धालुओं की संख्या 1 लाख और उससे भी ऊपर हो जाती है।  

खाटू श्याम की फेमस चीज क्या है?

समोद मंदिर यह सिर्फ राजस्थान में ही नहीं पुरे भारत में प्रशिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ पे हनुमान जी की 6 फ़ीट की विशाल मूर्ति है साथ ही भगवन राम का भी मंदिर देखने को मिलेगा। 

 

   

Leave a comment