10 +तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह , जाने का समय और खर्चा

भारत के तिरुपति बालाजी के दर्शन और तिरुपति बालाजी में घूमने की भारत के धार्मिक स्थल और पर्यटन स्थलों में काफी ज्यादा प्रशिद्ध है। अगर आप भारत से हैं धार्मिक स्थलों की बात करें और तीर्थ स्थानों की बात करें, तो सबसे पहले बाला जी का है नाम आता है। अगर आप भारत भर्मण का मन बना रहें हैं तो फिर तिरुपति बालाजी को इग्नोर करने की गलती कभी भी न करें , इसकी पूरी जानकारी के लिए हमारा यह लेख आपके लिए काफी मददगर होने वाला रहने वाला है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुमला की पहाड़ियों में स्थित है।

तिरुपति में घूमने की जगह ,जाने का समय और खर्चा

यह मंदिर तिरुमाला की पहाड़ियों में काफी चमत्कारिक मंदिर है , जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी ज्यादा प्रशिद्ध है। तिरुपति के बालाजी का यह मंदिर सिर्फ भगवान विष्णु के भक्तों के लिए ही नहीं बल्कि पर्यटकों के लिए भी काफी ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। क्योंकि यह समुद्र के किनारे बसा हुआ , चारों तरफ प्रकृति का हरा भरा नजारा देखने को मिलता है। इसलिए यह सिर्फ धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी काफी प्रशिद्ध है।

तिरुपति के जाने वाले लोगों में से कुछ भक्त होते हैं और कुछ पर्यटक होते हैं। आप जो भी हैं बिना जानकारी के आप कहीं भी नहीं जा सकते हैं और यहाँ के आस पास को घूमने फिरने का मजा भी नहीं ले सकते हैं।

हमारे इस लेख में आप तिरुपति बालजी में घूमने की जगहों से संबंधित सारी जानकारी आसानी से ले सकते हैं जैसे तिरुपति मंदिर कब जाना चाहिए , कैसे जाना चाहिए , कहाँ रुकें , क्या खाये , मंदिर में पूजा अर्चना कैसे करें ,यहाँ बाल दान करने की प्रथा क्यों चली आ रही है, तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए टिकट कब और कैसे लेना चाहिए ।

Contents

तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे में जानकारी -Tirupati Balaji Mandir Travel Info In Hindi

तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह और तिरुपति का यह मंदिर हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र और धार्मिक स्थल है। यह मदिर काफी चमत्कारिक मंदिर यहाँ आने वाले भक्तों या पर्यटकों की मुरादें बाबा वेंकेश पूरा करते हैं। यहाँ एक मान्यता यह भी है की यदि कोई भी व्यक्ति यहाँ पर कुछ रूपये दान करते हैं तो फिर उनके यहाँ काफी भी धन लक्ष्मी की कमी नहीं होती है।

ऐसा भी मान्यता है की गलती से यदि आप से कोई पाप हो गया हो तो यहाँ आके पश्चाताप करने से सारे पाप धूल जाते हैं। और उसके बाद आपको मोक्ष की प्राप्ति होती है। मतलब आपको हर चीज में सफलता मिलनी शुरू हो जाती है।

तिरुमल मंदिर तिरुमला पहाड़ियों पे स्थित है जो की समुन्द्र तल से 853 फ़ीट की उंचाइ पर स्थित है , जिसके आस पास आपको 7 पहाड़ियां देखने को मिलते हैं ,इसलिए इसे साथ पहड़ियों के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर का नाम देश के सबसे अमीर मंदिरों में से आता है क्योंकि यहाँ दान में मिलने वाली राशि की सांख्या करोड़ों में होती है।

जब यहाँ का दान पेटी खुलता है तो दान में मिलने वाले नोटों की संख्या को गिनने में सिर्फ 10 से 15 दिन का समय लग जाता है। इस मंदिर में मिलने वाले नोटों से बहुत सारे अनाथ आश्रम चलाये जाते हैं और इन रुपयों को बाढ़ सुनामी तथा कोरोना जैसे महामारी में इस्तेमाल किया जाता है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब भगवन विष्णु क्षीर सागर में विश्राम कर रहे थे तब एक ऋषि ने उनके सिने में लात मर दिया था। तब भगवान विष्णु ने उन्हें सजा देने की बजाय माफ़ कर दिया था। इससे नाराज होकर लक्ष्मी जी बैकुंठ धाम को छोड़ कर पृथ्वी लोक में चली गयी। जिससे ढूढ़ते हुए विष्णु जी ने भी यहाँ जन्म लिया। इस तरह से तिरुपति मंदिर का निर्माण हुआ। तिरुपति का शाब्दिक मतलब सम्मानीय पति जो की भगवान विष्णु के लिए उपयोग किया जाता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर की वास्तुकला – Tirupati Balaji Temple Architecture In Hindi

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित यह तिरुपति बालाजी मंदिर का वास्तुकला द्रविड़ शैली बना हुआ है। जो की काफी अध्भुत है और बालाजी के मंदिर में जो गर्भ गृह है उस नीलयम के नाम से जाना जाता है। तिरुपति का जो मंदिर है वह भगवान विष्णु का मंदिर है , यहाँ पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

तिरुपति मंदिर में जो भगवान विष्णु की काले रंग की प्रतिमा है इसे किसी ने बनाया नहीं है यह जमीन से स्वयं प्रकट हुई थी। इसके बारे में मान्यता है की यह कलयुग के अंत तक रहें वाली है।

इस मंदिर में जो गोपुरम आपको देखने को मिलता है उसे पूरी तरीके से सोने से ढाका गया है। यहाँ मंदिर में आपको तीन द्वार देखने को मिलती है तीनों द्वारों के ऊपर स्वर्ण कलश देखने को मिलता है। मुख्य द्वार को पडिकावली के नाम से जाना जाता है। यहाँ बालाजी के शीर्ष पर आपको साथ सोने की कलश देखने को मिलती है , जिसे वेंडी वकीली कहा जाता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास –Tirupati Balaji Mandir History In Hindi

अगर तिरुपति बालाजी के इतिहास की बात की जाय तो बालजी के निर्माण का कार्य 300 ईसवी में आरम्भ हुआ था। समय समय पर में कई राजाओं का इसके विकाश में काफी बड़ा योगदान रहा है।

इस मंदिर के निर्माण और विकाश करने में सबसे बड़ी भूमिका 18 वी शतब्दी में राघोजी भोंसले को जाता है। इन्होने इस मंदिर के देखरेख और व्यवस्था के लिए एक एक स्थाई कमिटी का गठन किया। इस कमिटी या समिति में मंदिर के लिए देखरेख के लिए सारे नियम कानून बनाये गए हैं।

आज भी यह समिति काफी अच्छी तरह से काम करती है। पूरी मंदिर को सुचारु रूप से चलने वाली इस समिति का नाम तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम है।

इस कमिटी को 1935 में काफी अच्छी तरह से विकसित किया गया। वर्तमान में यह समिति पुरे मंदिर के कार्यभार को काफी अच्छी तरह से चलती है।

तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े तथ्य – Interesting Facts about Tirupati Balaji in Hindi 

आंध्र प्रदेश के चितुर जिले के तिरुमला पहाड़ी पर स्थित इस तिरुपति मंदिर में आज भी बहुत सारे चमत्कारिक रहस्य देखने को मिलते हैं। जिसका रहस्य आज भी साइंटिस्ट को समझ में नहीं आता है।

  • अगर आप तिरुपति मंदिर घूमने के लिए जाते हैं तो यहाँ मंदिर के प्रवेश द्वार में आपको एक जादुई छड़ी देखने को मिलती है। हजारों सालों से इस छड़ी की चमक ऐसे ही देखने को मिलती है। कहा जाता है जब भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की खोज में धरती लोक में आये थे। तो इस जादुई छड़ी को उसने आपने साथ रखा था, इस छड़ी माता लक्ष्मी जी को ढूंढने में काफी मदद किया था।
  • मंदिर में स्थापित मूर्ति में जो बाल लगे हैं वह रेशम के हैं और देखने में बिलकुल भी असली लगते हैं। इन बालों में आज तक कभी भी उलझा हुआ नहीं देखा गया है तथा इन्हे कभी भी गन्दा होतो हुआ कभी भी नहीं देखा गया है।
  • मंदिर के गर्भ गृह को काफी ठण्डा रखने के बावजूद भी मूर्ति में पसीना देखा जाता है। जिसे वहां के पुजारी हमेशा रुमाल से पोंछते रहते हैं। यह भी किसी चमत्कार से काम नहीं है जिसका पता अभी तक वैज्ञानिकों नहीं चल पाया है।
  • तिरुपति मंदिर के गर्भ गृह में जो प्रतिमा लगी हुई है मंदिर में प्रवेश करने से पहले यदि आप इसे बाहर से देखेंगे को यह बाईं और दिखाई देती है लेकिन मंदिर में प्रवेश करते ही यह मूर्ति बीच में दिखाई देने लगाती है। यह भी किसी चमत्कार से काम नहीं है। ऐसा किसी एक भक्त गण के साथ नहीं हर शर्धालुओं के साथ होता है।
  • मंदिर में स्थापित मूर्ति में जिस कपूर का इस्तेमाल किया जाता है उसे पिचाई कपूर कहते हैं यह कोई साधारण कपूर नहीं होता है। इस कपूर को यदि आप पत्थर में रगड़ते हैं तो पत्थर में दरार पड़ जाती है। लेकिन जब इसे मूर्ति में रगड़ा जाता है तो मूर्ति में कोई भी दरार नहीं देखा जाता है।
  • यह मंदिर इतना प्रशिद्ध होने के बावजूद भी यहाँ किसी भी तरह के बल्ब का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यहाँ सिर्फ दीयों का ही उपयोग करके पुरे मंदिर परिसर में अधभूत रौशनी को बिखेरा जाता है।
  • यदि आप तिरुपति बालाजी मंदिर के पास कान लगाकर बैठते हैं तो आपको समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है कहा जाता यह जो समुंदर की लहरों की आवाज सुनाई देती है वह बैकुंठ से आती है।
  • मंदिर में स्थित तिरुपति बालाजी के मूर्ति में प्रत्येक गुरुवार को चंदन का लेप लगाया जाता है और इसके बाद जब इसे धोया जाता तो इस मूर्ति के सीने में लक्ष्मी जी की छवि दिखाई देती है।
  • यहाँ एक दीपक ऐसा भी है जो की हजारों सालों से जलता आ रहा है , जिसमे कोई तेल या घी नहीं डाला जाता है। यह सब सिर्फ तिरुपति बालाजी का है चमत्कार है।
  • मंदिर में स्थित वेंकटश्वर की मूर्ति को साड़ी और धोती दोनों ही पहनाया जाता है , नीचे धोती और ऊपर साड़ी पहनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है की मंदिर में स्थित मूर्ति में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों का वास होता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर की कहानी – History of Tirupati Mandir In Hindi

तिरुपति बालाजी की कहानी की बात की जाय तो इसकी कहानी सिर्फ पृथ्वी लोक की ही नहीं इसकी कहानी वैकुण्ठ धाम से शुरू होती है।

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु जी अपनी शैय्या पर लेटे हुए थे। तब ऋषि भृगु ने विष्णु जी के छाती पे लात दे मारी इस पर उसे श्राप देने के बजाय विष्णु जी ने माफ़ कर दिया। यह सब देखने के बाद माता लक्ष्मी से रहा नहीं गया और नाराज होकर बैकुंठ धाम छोड़ कर चली गयी।

उसके बाद भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी बहुत ढूंढा पर कही उसका पता नहीं चला बाद पता चला की माता लक्ष्मी ने माता लक्ष्मी बैकुंट धाम को छोड़कर पृथ्वी लोक में रानी पध्मावती के रूप में जन्म ले चुकी थीं।

उसके बाद भगवान विष्णु ने भी धरती लोक में जाने की ठान ली , बाद में भगवान वेंकटेश्वर के रूप में धरती में जन्म लिया और रानी पद्मावती के माता पिता से शादी की इक्छा जाहिर किया।

शादी के लिए रानी पद्मावती के माता पिता मान गए , लेकिन शादी के दौरान भगवान विष्णु को धन की परेशानी का सामना करना पड़ा। तब उन्होंने कुबेर जैसे धन के देवता से धन की राशि उधार में लिया और शादी सम्पन हुआ।

तिरुपति बालाजी का यह मंदिर भारत के सबसे अमिर मंदिरों में इसका नाम आता है। लेकिन यहाँ स्थित भगवान आज भी कर्ज के टेल डूबे हुए हैं इसलिए कहा जाता है भगवान गरीब हो सकता है , लेकिन उसका भक्त नहीं।

इस मंदिर की मान्यता है की जो कोई भी इस मंदिर में धन राशि दान करता है। उसके यहाँ में धन हमेशा वृद्धि होती है और उसके यहाँ कभी भी धन की कमी नहीं होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को बालाजी अवश्य जाना चाहिए। और जिसको इसके बारे में जानकारी होती है वः जीवन में बालाजी अवश्य जाना कहते हैं।

तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान करने की सच्चाई – Hair Donation Tradition In Tirupati Balaji 

आन्ध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी में बाल दान करने की परम्परा सदियों से चली आ रही है।

यहाँ की एक विशेष मान्यता है की इस मंदिर में आने वाले सारे श्रद्धालुओं को अपना घमंड अहंकार और बुरे विचारों को त्यागना होता है। उसके पहले और इसके लिए उसे यहाँ पर बाल दान करना होता है।

और इसके बाद आप अपने जिंदगी में नई ऊंचाई को छू सकते हैं , क्योंकि अब आपके पास पहले से ज्यादा शक्तिशाली मन और दिमाग होता है।

तिरुपति में घूमने की जगह – Places to visit in tirupati

अगर आप तिरुपति में घूमने का मन बना चुकें हैं तो आपको बता दें यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र तिरुपति बालाजी मंदिर ही है और साथ में आप तिरुपति बालाजी में घूमने की जगहों में बाकि पर्यटन स्थलों का भी भरपूर मजा ले सकते हैं।

तिरुपति बालाजी मंदिर को वेंकटेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद आप आस पास घूमने की जगहों का भर्मण करके अपनी यात्रा को शानदार और यादगार बना सकते हैं।

श्री हनुमान मंदिर तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह

तिरुपति बालाजी के समीप आपको बहुत सारे मंदिर धार्मिक स्थल पर्यटन स्थल और दर्शनीय स्थल देखने को मिलते हैं उनमे से एक नाम आता है हनुमान जी का मंदिर जो की तिरुपति मंदिर के करीब ही है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग में जब भगवान श्री राम को वनवास मिला था उस समय भगवान श्री राम , लक्ष्मण और माता सीता के साथ कुछ पल के लिए इस स्थान में आके रुके थे। यहाँ घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह काफी प्रशिद्ध जगह है।

पदमावती अम्बावरी मंदिर

पद्मावती अम्बावरी का मंदिर आंध्र प्रदेश से मात्र 5 किलोमीटर की दुरी पर देखने को मिलता है। जो तिरुपति बालाजी मंदिर के नजदीकी गांव तिरुचनूर में स्थित है।

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इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी पद्मावती का पूजा किया जाता है जो की माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव सम्पदा और समृद्धि की देवी मानी जाती है। और इसका यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए काफी ज्यादा प्रशिद्ध है।

इस मंदिर की एक विशेष मान्यता यह है की कोई भी श्रद्धालु तिरुपति बालाजी में दर्शन करने के बाद यदि इस पद्मावती मंदिर का दर्शन न करे तो फिर उसकी मान्यता पूर्ण नहीं होती है।

इस मंदिर में माता लक्ष्मी के साथ साथ आपको भगवान श्री कृष्ण के भाई बलराम, सूर्य नारायण स्वामी और सुंदर राज स्वामी की भी मूर्ति देखने को मिलती है।

कपिला तीर्थम

तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह में कपिला तीर्थम काफी प्रशिद्ध धार्मिक स्थलों में एक है। यहाँ पर स्थित मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

सावन के महीनो में और शिवरात्रि के समय में यहाँ भक्तों का काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिलता है। इस समय में आपको यहाँ के स्थानीय लोंगो के बारे में तथा उनके रीतिरिवाजों को समझने का मौका मिलता है।

हिन्दू धर्म के लोगों के लिए यह काफी पवित्र स्थान माना जाता है , कहा जाता है इस जगह पर ऋषि मुनि तपस्या करने के लिए आया करते थे। कपिला तीर्थम आपको मंदिर से करीब 22 से 30 किलोमीटर की दुरी में देखने को मिलती है।

गोविंदराज स्वामी मंदिर

तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह में एक और प्रशिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल गोविन्द राज स्वामी मंदिर जी का मंदिर है।

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आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में बालाजी मंदिर के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा तथा प्रशिद्ध मंदिर है। जहाँ आपको भगवान गोविन्द राज जी का मंदिर देखने को मिलता है , जो की भगवान वेंकेटेश्वर के बड़े भाई के रूप में जाने जाते हैं।

तिरुपति में घूमने की जगह में यह मंदिर काफी ज्यादा आकर्षक है , इस मंदिर के दीवारों में आपको रामायण और गीता की पंक्तियाँ देखने को मिलती है।

तुम्भुरु तीर्थम

अगर आप नेचर लवर हैं तो फिर तिरुपति में घूमने की जगह में तुम्भुरु तीर्थम में आपका स्वागत है। यहाँ आपको चा रों तरफ सिर्फ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है।

तिरुपति मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद यदि आप कहीं प्रकृति के बीच कुछ शांति के पल बिताना चाहते हैं तो सपरिवार आप इस पर्यटन स्थल में आ सकते हैं जो की तिरुपति मंदिर से मात्र 12 से 13 किलोमीटर की दुरी में स्थित है।

यह आपके यात्रा को यादगार तथा शानदार बना देता है।

हिरण पार्क

यदि आप अपने परिवार और बच्चों के साथ तिरुपति मंदिर में घूमने के लिए आ रहे हैं तिरुपति बालाजी में दर्शन केबाद आप हिरण पार्क में जाना बिलकुल भी न भूलें , यह पार्क तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह के लिए काफी प्रशिद्ध है। श्रद्धलुओं के लिए यह काफी लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और यहाँ आने वाले पर्यटक यहाँ आके शांति के कुछ पल जरूर बिताते हैं।

यह पार्क तिरुमला पहाड़ियों से मात्र 15 से 20 किलोमीटर की दुरी में स्थित है , जो की पहाड़ियों के आधार पर देखने को मिलती है। यहाँ आपको कुछ छोटी छोटी दुकाने भी देखने को मिलती है।

तिरुपति में घूमने की जगह के इस लोकप्रिय पार्क में आप हिरण , मोर और कई छोटे जानवरों के साथ खेलने का भी मौका मिलता है इस दौरान आपको इन जानवरों को खाना खिलाने का भी मौका मिलता है।

श्री वेंकटेश्वर राष्ट्रीय उद्यान

तिरुपति में घूमने की जगह में श्री वेंकटेश्वर मंदिर में आने वाले उन श्रद्धावों के लिएयह किसी स्वर्ग से कम नहीं है जिसे पेड़ पौधों तथा जीव जंतुओं से काफी ज्यादा प्रेम है।

तिरुपति में घूमने की जगह में प्रशिद्ध यह राष्ट्रीय उद्यान यह वेन्कटेशवर मंदिर से मात्र 8 से 9 किलोमीटर की दुरी में देखने को मिलता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में आपको 178 से भी ज्यादा प्रजाति के पक्षी देखने मिलते हैं। यहाँ आपको विभिन प्रकार के जानवर भी देखने को मिलते हैं जैसे भालू ,हिरन , तेंदुवा तथा हाथी आदि।

5000 एकड़ में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में आपको तरह तरह के स्थानीय पौधे चंदन, रेड सैंडर्स शोरिया थंबर्गिया भी देखने को मिलते हैं।

इस राष्ट्रीय उद्यान मे आपको एक झरना भी देखने को मिलता है , जो की तालकोना के नाम से जाना जाता है। 82 मीटर कि ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना भारत के सबसे ऊँचे झरने के रूप प्रशिद्ध है। झरने का जो पानी है उसमे जड़ी बूटी और औषधीय गुणों से भरपूर होता है इसलिए यह चर्म रोगियों के लिए राम बाण के तरह काम करता है।

यहाँ आते वक्त साथ में दूरबीन रखना बिलकुल भी भूलें , जिसकी मदद से आप यहाँ के आसपास नज़रों तथा दूर के दृश्यों को काफी अच्छी तरह से देख सकते हैं।

स्वामी पुष्करिणी झील

तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह में तिरुपति मंदिर के पास ही एक पुष्करणी झील देखने को मिलता है , जो की हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र कुंड माना जाता है। इस पुष्करणी कुंड में स्नान करने के बाद ही श्रद्धालु तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं।

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार इस झील को गरुड़ जी के द्वारा धरती पर लाया गया था। गरुड़ जो की भगवान विष्णु का वाहन है। और यह भी मान्यता है की इसी झील में भगवान विष्णु ने भी धरती लोक में स्नान किये थे।

चंद्रगिरी

चंद्रगिरि तिरुपति में घूमने की जगह में काफि प्रशिद्ध पर्यटन स्थल है। मंदिर में दर्शन के बाद यहाँ घूमना बिलकुल भी न भूलें। यह तिरुपति से 16 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।

इसे पहले विजय नगर की चौथी राजधानी के रूप में जाना जाता था। यहाँ पर आपको और दो आकर्षकमहल और एक किला देखने को मिलता है।

किले को विशाल चट्टान पर बनाया गया है जहां से पुरे शहर का नजारा साफ़ दिखाई देता है , इस किले का निर्माण विजय नगर के शासकों के द्वारा कराया गया था।

देवस्थानम गार्डन

तिरुपति में घूमने की जगह में देवस्थानम काफी लोकप्रिय पर्टयन स्थल है। इसका क्षेत्रफल 450 एकड़ भूभाग में फैला हुआ है।

यहाँ आपको तरह तरह के रंग बिरंगे फूलों के गार्डन और कई तलाब देखने को मिलते हैं। यहाँ कुछ देर बैठने के बाद श्रद्धालु आपने सारे स्ट्रेस को भूल जाते हैं।

क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र

तिरुपति में घूमने की जगह में एक और अति रुचिकर पर्यटक स्थल है यहाँ का क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र , यदि आप आपने बच्चों के साथ यहाँ घूमने के लिए आ रहे हैं तो फिर यह जगह आपके लिए बेस्ट जगह हो सकता है।

यहाँ आपको विज्ञान से सम्बंधित बहुत कुछ सिखने को मिलता है। यहाँ आपको एक तारा मंडल भी देखने को मिलता है जिसमे सौर्य मंडल और अंतरिक्ष से जुड़ी फिल्मे दिखया जाता है और भी विज्ञान से जुड़ी काफी रोचक जानकारी दिखाई जाती है।

यहाँ का प्रवेश शुल्क मात्र 150 रुपया है।

सिलाथोरनाम

तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह में एक नाम सिलाथोरनाम का भी आता है। इसकी प्रशिद्धि का मुख्य कारण है की यह 3 प्राकृतिक राख में से एक है। इस चटान की आयु तक़रीबन 150 करोड़ से भी पुरानी मानी जाती है।

इस चट्टान की सबसे बड़ी खासयत यह है दूर से देखने में बिलकुल एक नाग और शंख जैसा दिखता है।

तिरुपति बालाजी कैसे पहुंचे? – How To Reach Tirupati Balaji Temple In Hindi

भारत के किसी भी शहर से तिरुपति आने के लिए आपको बस ट्रेन और हवाई जहाज आसानी से मिल जाएगी। जो भी आपके लिए आपके बजट और लोकेशन के हिसाब से सही हो उसकी मदद से अपनी आगे की यात्रा को पूरा कर सकते हैं।

रेल मार्ग के माध्यम से

यदि आप तिरुपति ट्रेन से आना चाहते हैं तो आपको बता दें की यहाँ का रेल नेटवर्क भारत के सभी प्रमुख शहरों से काफी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अगर आप भारत के किसी छोटे शहरों से है तो पहले इन प्रमुख शहरों तक पहुँच जाएँ उसके बाद आगे की यात्रा आपको करने में किसी भी तरह का कोई परेशानी नहीं हो सकती है।

यदि आप आप तिरुपति रेलवे स्टेशन में रुकना चाहते हैं तो आपको बता दें की यहाँ ज्यादा गाड़ियां नहीं रूकती है। इसके बदले आप रेणुगुंटा जंक्सन पर रुक सकते हैं। यह तिरुपति बालाजी का प्रशिद्ध जक्शन है जो की तिरुपति जंक्शन से मात्र 7 किलोमीटर की दुरी पर है। यहाँ पर रोजाना भारत के प्रमुख शहरो से रेलगाड़ियों का आना जाना लगा रहता है।

इस तरह से आप रेणुगुंटा की मदद से तिरुपति बालजी मंदिर तक आसानी से पहुँच सकते हैं। इस रेणुगुंटा जंक्शन में आपको तिरुपति बालाजी के ट्रस्ट से चलनी वाली बस देखने को मिलती है जो यात्रियों को रेलवे स्टेशन से मंदिर तक छोड़ने का काम करती है।

सड़क मार्ग के माध्यम से

यदि आप सड़क के माध्यम से तिरुपति का दर्शन करना चाहते हैं तो आसानी से कर सकते हैं क्योंकि भारत में सड़क मार्ग काफी अच्छी तरह से पुरे देश से जुड़ा हुआ है। आप चाहे तो अपनी निजी बस के माध्यम से भी आ सकते हैं या फिर तिरुपति के लिए चलने वाली बस का भी प्रयोग कर सकते हैं।

कुछ लोकप्रिय शहरों से बेंगलूर , हुबली तथा चित्तूर से आपको तिरुपति बालाजी के लिए डायरेक्ट बस मिल जाती है आप चाहे तो यहाँ से भी तिरुपति के बस ले सकते हैं।

हवाई मार्ग के माध्यम से

अगर आपका बजट अच्छा खासा है और आप हवाई मार्ग के द्वारा जाना चाहते है तो आपके लिए यह यात्रा और भी सुविधा जनक और आसान होने वाला है क्योंकि यहाँ तिरुपति अंतरास्ट्रीय हवाई अड्डा है। जो की देश विदेश के लिए रोजाना फ्लाइट की सुविधा मुहैया कराती है।

आप अपने शहर के हवाई अड्डा से तिरुपति के लिए आसानी से फ्लाइट बुक कर सकते हैं।

तिरुपति बालाजी में भोजन की व्यवस्था

आप अकेले आ रहे हैं या सपरिवार के साथ आ रहें हैं यहाँ आपको भोजन के लिए किसी भी प्रकार की चिंता करने की कोई भी जरुरत नहीं है क्योंकि यहाँ पर मंदिर के ट्रस्ट की और से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की भोजन की पूरी व्यवस्था होती है।

यहाँ आपको सुबह 9 से 11 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए नास्ते की व्यवस्था है और दोपहर में 11:00 से 4:00 बजे तक लंच (भोजन) की व्यवस्था होती है।

तिरुपति जाने का सही समय – Best Time To Visit Tirupati Balaji Mandir In Hindi

वैसे अगर तिरुपति मंदिर की बात करें तो यहाँ सालों भर श्रद्धालुओं का भीड़ देखने को मिलता , अगर आप सिर्फ मंदिर में पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो आप साल भर में कभी भी जा सकते हैं।

लेकिन यदि आप तिरुपति मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद यदि आपका तिरुपति में घूमने की जगहों को भर्मण करने का प्लान है तो आपको एक सही समय में आना चाहिए , ताकि आप अपनी यात्रा का भरपूर मजा ले सकें।

यदि आप गर्मियों के मौसम में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है , क्योंकि गर्मियों के समय में यहाँ का तापमान 42 से 43 डिग्री का होता है। जो की आपके पुरे यात्रा के मजा को किरकिरा कर देता है।

साथ ही यदि आप मंदिर में दर्शन करने के लिए भी जाते हैं तो यहाँ आपको का लम्बी लाइन में लगना होता है जिसमे आप 24 से 36 घंटा तक इंतजार करना पड़ सकता है। गर्मियों के समय में इतने घंटा तक इंतजार करने में श्रद्धालुओं का हलात ख़राब हो जाता है।

इसलिए तिरुपति मंदिर में पूआ करना हो या फिर तिरुपति में घूमने की जगह को भर्मण करने की बात हो तो इसके लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा रहता है। जो की ऑक्टूबर से मार्च के बीच होता है और इस दौरान आपको किसी भी तरह के समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। जिससे आपका सफर सुहावना और यादगार बना जाता है।

तिरुपति बालाजी के दर्शन कैसे करें?

अगर आप तिरुपति बालाजी में दर्शन करना चाहते हैं तो फिर तिरुपति में घूमने की जगह का भर्मण करना चाहते हैं तो उसकी तैयारी आपको पहले से करनी होती है। तिरुपति बालाजी के मंदिर में आपको भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी संयोजित मूर्ति देखने को मिलती है।

तिरुपति बालाजी की दर्शन करने से पहले आपको एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरना होता है , उसके बाद आप यहाँ तिरुपति बालाजी के दर्शन कर सकते हैं।

तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए रोजाना काफी संख्या में श्रद्धालु भीड़ उमड़ती है इसलिए यहाँ पर ऑनलइन टिकट की भी सुविधा उपलब्ध कराई गयी है।

साथ ही तिरुपति मंदिर पहुँचते हैं ही आप यहाँ काउंटर में टिकते ले सकते हैं , जो की बिलकुल मुफ्त में मिलती है। अगर आप ऑफलाइन टिकट बुक करते हैं तो आपको यहाँ आपको 24 से 36 घंटा तक लाइन में वेट करना पढ़ सकता है

अगर आप इन लम्बी लाइन से बचना चाहते हैं तो आपको 90 दिन पहले ही ऑनलाइन टिकट बुक करना होता है जो की आप इसके ऑफिसियल वेबसाइट tirumala.org में जाकर ऑनलाइन पास बना सकते हैं। इसके लिए आपको अपना पहचान पत्र दिखाना होता है। यहाँ जो ही टिकट आपको मिलता है वह बिलकुल फ्री होता है।

टिकट बुक करने के बाद बालाजी जी के दर्शन से पहले आपको पुष्करणी नदी में स्न्नान करना होता है और उसके बाद आप जय गोविंदा का नारा लगाते हुए आगे बढ़ना होता है।

आपके पास जो ऑनलाइन टिकट है उसके उसके मदद से आप यहाँ बिना लाइन में लगे बिना 24 और 36 घंटा लाइन में वेट किये बिना आसानी से तिरुपति बालाजी का दर्शन काफी काम समय में कर सकते हैं।

इसके अलावा अगर आप कम समय में बालाजी के दर्शन करना चाहते हैं तो फिर इसके लिए आपके पास मंत्री नेता और विधायक का सिफारिश होना चाहिए।

तिरुपति बालाजी में ठहरने की व्यवस्था

अगर आप तिरुपति बालाजी पूजा अर्चना या घूमने फिरने के लिए आ रहे हैं तो फिर आपको यहाँ रुकने रहने और खाने पीने की बिलकुल भी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यहाँ आने वाले सारे श्रद्धालुओं के रहने और खाने पीने की सारी व्यवस्था ट्रस्ट के द्वारा शानदर तरीके से की जाती है।

ट्रस्ट के अलावा यहाँ आप तिरुपति बालाजी के होटल में भी रुक सकते हैं यहाँ आपको सस्ते महंगे दोनों तरह के होटल मिल जाते हैं।

साथ ही यहाँ आपको तिरुमाला बस स्टेण्ड के पास केन्द्रीय शिक्षण कार्यालय में संपर्क करके छात्रावास हाल में आप पाने लिए रुकने की व्यवस्था कर सकते हैं।

तिरुपति बालाजी दर्शन में कितना समय लगता है

अगर आप 90 दिन पहले ही ऑनलाइन टिकट बुक कर लेते हैं तो ऐसे में आप यहाँ मात्र एक ही दिन में तिरुपति बालाजी में दर्शन कर सकते हैं।

अगर आपके पास ऑनलाइन टिकट है तो आप सिर्फ दिन भर में आराम से दर्शन करने के बाद शाम को घर आ सकते हैं।

लेकिन यदि आपके पास ऑनलाइन टिकट नहीं है और ऐसे में आप वह जाकर टिकट लेते हैं तो आपको दर्शन करने के लिए 24 से 36 घंटे का वेट करना पड़ सकता है।

इसलिए आपको लिए बेहतर होगा की जब कभी भी यहाँ पर यात्रा के मकसद से आयें तो 3 दिन के लिए प्लान बनायें, ताकि आप अच्छे तरीके से तिरुपति में पूजा अर्चना कर सकते हैं और तिरुपति में घूमने की जगह का भर्मण कर सकते हैं।

तिरुपति बालाजी घूमने का खर्चा – Tirupati Balaji Temple Trip Budget In Hindi

तिरुपति में बालाजी के मंदिर में पहुँचने के बाद यदि आप रुकने और खाने पीने के लिए कुछ दिनों के लिए मंदिर के ट्रस्ट या छात्रावास में रहते हैं तो फिर आप बिलकुल मुफ्त में रह सकते हैं।

लेकिन यदि आप रुकने के लिए यहाँ के होटल का इस्तमाल करते हैं तो 2 से 3 दिन के लिए का खर्च 2500 से 3000 के बीच आ सकता है।

आपका कुल खर्च यहाँ आने के साधन पर निर्भर करता है यदि आप बस या ट्रेन आते हैं तो फिर कम खर्चों में भी निपट सकता है लेकिन यदि यहाँ आने के लिए आप फ्लाइट का इस्तेमाल करते हैं तो फिर यह बढ़कर 6 से 7 हजार हो सकता है।

तिरुपति बालाजी दर्शन करते समय साथ में क्या रखें?

किसी भी यात्रा में जाने से पहले आपको कुछ चीजों को अपने पास रखना अति आवश्यक होता है कैश रुपया , अपना पहचान पत्र आदि। इसके अलावा यहाँ आपको ज्यादा कुछ लाने की जरूरत नहीं है क्योंकि यहाँ अपर ट्रस्ट की और से आपको हर चीज की सुविधा मिल जाती है।

ठंडी के मौसम में आ रहे हैं तो कम से कम सफर दौरान इस्तेमाल करने के लिए ब्लैंकेट , स्वैटर और जैकेट को अपने साथ रखना कभी भी न भूलें।

निष्कर्ष

तिरुपति बालाजी का यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के नाम से जाना है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र धार्मिक स्थल है। जीवन को नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए और जीवन को काफी सफल बनाने के लिए , हर हिन्दुओं की तम्मना जीवन में यहाँ एक बार आने की होती है।

इस लेख में आप तिरुपति बालाजी में घूमने की जगह , जाने का समय , कब जाएँ कैसे जाएँ और घूमने के लिए क्या करें , तिरुपति से जुडी सारी जानकारी इस लेख में आपको आसानी से मिल जाती है।

अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो तो तिरुपति में घूमने की जगह के बारे में जानकारी की तलाश कर रहे अपने सारे दोस्तों परिजनों और रिश्तेदारों को यह लेख शेयर करना बिलकुल भी न भूलें।

इस लेख से सम्बंधित कोई भी सुझाव व सवाल अगर आपके मन में चल रहा हो तो कमेंट सेक्शन में पूछना बिलकुल भी न भूलें।

तिरुपति बालाजी में दर्शन के लिए कितना समय लगता है ?

तिरुपति बालजी में दर्शन के लिए आपको 2 स 3 दिन का समय लग सकता है। अगर आप काम समय में दर्शन करना चाहते हैं तो आपको 90 दिन पहले ही ऑनलाइन टिकट बुक करना होता है।

तिरुपति बालाजी में दर्शन के लिए कितन खर्च करना होता है ?

अगर आप तिरुपति में सिर्फ 2 से 3 दिन रुकने का मन बना रहें हैं 2500 से 3000 खर्च करना पढ़ सकता है।

तिरुपति बालाजी का यह मंदिर कहा पर स्थित है ?

तिरुपति बालाजी का यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चितुर जिले के तिरुमला पहाड़ियों में स्थित है।

तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान क्यों किया जाता है ?

जब भी कोई श्रद्धालु तिरुपति मंदिर में घूमने के लिए आता है तब वः निश्चित रूप से यहाँ बल दान करके जाता है। यहाँ की यह प्रथा हजारों से सालों से चली आ रही है। माना जाता है बल दान करने के साथ साथ श्रद्धालु अपनी घमंड, अहंकार, बुराइयों और नकारात्मक विचरों को यहाँ पर त्याग देते हैं।
अपनी जिंदगी को नए सिरे से फिर से शुरू करते हैं और भी समृद्ध बनाते हैं।

तिरुपति के लिए टिकट बुक करने के लिए कौन सी ऑफिशल वेबसाइट है ?

तिरुपति में दर्शन के लिए लम्बी लाइन से बचने के लिए आपको 90 दिन पहले आपको ऑनलाइन टिकट बुक करना होता है और उसके ऑफिसियल वेबसाइट tirumala. org है।

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