20 + वृंदावन में घूमने की जगह, खर्चा जाने का समय

अगर आप वृंदावन में घूमने की जगह , खर्चा और दर्शनीय स्थल के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख में इससे जुडी सारी जानकारी आपको आसानी मिल जाएगी।

वृन्दावन में घूमने की जगह, खर्चा और जाने का समय
canva.com

वृन्दावन हिन्दुओं के लिए पवित्र धर्म स्थलों में से एक है और इससे ही सम्बंधित काफी सारी वृन्दावन में घूमने की जगह भी है यह भगवन कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से थोड़ी दुरी पर स्थित है पूरा वृन्दावन भगवान कृष्ण के बाल लीलाओं से भरा पड़ा है। यहाँ आपको भगवन श्री कृष्ण के बचपन के लीलाओं के बारे में जानने को मिलेगा और यहाँ आपको कई सरे देशी विदेशी इसे भी लोग मिलेंगे जो कृष्ण भक्ति में इतने डूब चुके हैं जो अपनी सारी जिंदगी यही बिताना चाहते है इस वजह से वे यहाँ आके बसे हुए हैं।

इस लेख में आप वृन्दावन में घूमने की जगह के बारे में सब कुछ विस्तार से जानेंगे, इसके अलावा अगर आपके पास किसी भी अन्य तरह का सवाल है वृन्दावन के बारे जैसे की कब जाएँ, कैसे जाएँ , कहा रुके , क्या खाएं उन सरे सावलें के जवाब आपको इसी लेख में मिल जायेंगे। बस इस लेख को शुरू से अंत तक ध्यान से पढ़े।

Contents

वृन्दावन का इतिहास और रोचक तथ्य

वृंदावन भारत के उतर प्रदेश के मथुरा जिले से 12 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र धार्मिक स्थल है जिसका अपना एक अलग ही इतिहास है। यह शहर भगवान श्री कृष्ण की बचपन की याद से जुड़ा है। इसे भगवन श्री कृष्ण के अलौकिक बाल लीलाओं का केंद्र कहा जाता है। यहाँ आपको काफी संख्या में श्री कृष्ण और राधा रानी के मदिर देखने को मिलेगा।

यदि आप कृष्ण की कथाओं में और भी रूचि रखते हैं तो द्वारिका में बारे में अवश्य पढ़े।

श्रीमद्भागवत के अनुशार गोकुल वासी कंस के अत्याचार से बचने के लिए अपने कुटुंबियों और रिश्तेदारों के साथ द्वारिका छोड़ वृन्दावन में आके बसे थे।

  • वृन्दावन के रंग महल में प्रत्येक दिन राधा कृष्ण के लिए पलंग लगा दिया जाता है। सारे सामग्री को सजा दिया जाता है और मंदिर का दरवाजा बंद कर दिया जाता है सुबह पट खुलते ही सारा सामान बिखरा हुआ मिलता है। मान्यता है की रात्रि के समय राधा कृष्ण यहाँ रासलीला करते है।
  • वृन्दावन में घूमने की जगह में से भगवान श्री कृष्ण का मंदिर ऐसा भी है जो की अपने आप खुलता और बंद होता है।
  • वृरंदावन मथुरा से 12 किलोमीटर की दुरी पर है , जहा भगवन श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
  • वृन्दावन को विधाओं का शहर भी कहा जाता है , क्योंकि यहाँ काफी सांख्या में विधवा आश्रम है जिसमे भरी सांख्या में विधवाएं रहती है।
  • वृन्दावन में काफी संख्या में मदिर होने के कारण और यहाँ का वतावरण साफ होने के कारण यह हिन्दुओं का पवित्र और प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
  • वृंदा का मतलब तुलसी होता है , वृन्दवन में तुलसी के पौधे जायदा होने के कारण वृन्दावन रखा गया है जिसका अर्थ है तुलसी का वन। यहाँ तुलसी के दो पौधे एक साथ देखने को मिलते है। कहा जाता है रात के समय जब राधा कृष्ण रासलीला करते है तो ये तुलसी के पेड़ गोपियाँ बनकर देती है। कोई चोरी छुपे से यहाँ का तुलसी का पता अपने साथ ले जाता है तो उसे भरी विपत्ति का सामना करना पड़ता है।
  • आज भी वृन्दावन में बांसुरी की आवाज सुनने को मिलती है , इसे सुनने के लिए श्रद्धालु कितने रातों तक यहाँ रुक कर इंतजार करते है।
  • भारत का सबसे ऊँचा मंदिर प्रेम मंदिर है जो की वृन्दावन में स्थित है , जिसे राधा कृष्ण के समपर्ण में बनाया गया था।
  • वृन्दावन के कई सारे ऐसे मंदिर देखने को मिलेंगे जिसका कारीगरी अद्भुत है।
  • यहाँ आपको अनेकों ऐतिहासिक धरोहर सैकड़ो आश्रम तथा वृद्धाआश्रम और अनेकों अनेक गोशालएँ देखने को मिलेगी।

वृन्दावन में घूमने की जगह(Vrindavan Tourist Places in Hindi)

जैसा की आप सभी जानते है वृन्दावन हिन्दुओं का पवित्र और धार्मिक स्थल है। यह श्री कृष्ण के बाल लीलाओं के लिए काफी प्रशिद्ध है।

जिसका उल्लेख रामायण महाभारत और विष्णु पुराण में भी देखने को मिलेगा।

यहाँ आपको सैकड़ों राधा कृष्ण का मंदिर देखने को मिलेगा उसमे से कुछ प्रशिद्ध मंदिरों और दर्शनीय स्थलों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है जिसके सहायता से आप अपनी यात्रा को और भी आरामदायक बना सकते हैं।

केसी घाटो

वैसे तो पुरा वृन्दावन भगवान श्री कृष्ण के भक्ति में डूबा रहता है वृन्दावन में एक घूमने की जगह में से एक जगह केसी घाटों भी है ।यहाँ आपको हर रोज पर्यटकों और भक्तों की काफी भीड़ देखने को मिलती है। क्योंकि यह वृन्दावन के सबसे महत्वपूर्ण पूजा स्थलों में से एक है।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को उनके मामा कंश के द्वारा कितने बार मरने की कोसिस की गयी , इनमे से एक बार उसने कृष्ण को मरने के लिए केशी नाम के राक्षस को भेजा , जब भगवान श्री कृष्ण ने केशी नाम के राक्षस का वध कर के यमुना नदी में स्नान के लिए गए तो इसका नाम केशी घाट पड़ा , यह वही स्थान है जहाँ केशी राक्षस को उसके अंत तक लाया।

keshi gaht vrindwan
Source -kesi Ghat vrindawan

धन वाणी

धनवानी वृन्दावन में घुमने की जगह में से एक है कहा जाता है यहाँ भगवन श्री कृष्ण राश लीला किया करते थे। यहाँ का पट 5 सुबह बजे से 8 बजे शाम खुला तक रहता है।

बंसी घाट

Banshi ghat
Source : jagran.com

बांसी घाट भी वृन्दावन में घूमने की जगह में काफी प्रशिद्ध स्थान है जहाँ भगवान श्री कृष्ण में शारद पूर्णिमा के शुभ दिन में गोपियों के साथ महारास लीला किया था। भगवान श्री कृष्ण इसी बरगद के निचे बांसुरी बजाया करते थे और यह वट वृक्ष 5500 साल पुराना है। इसी कारण से इस वट को वंशी वट कहा जाता है। दिव्य बांसुरी की आवाज सुनने के लिए सारी गोपियाँ अपने सारे काम को छोड़ कर कृष्ण की और खींची चली आती थी।

कहा जाता है गोपियों के शिकायत के बाद की वह सिर्फ राधा के साथ ही रास लीला करते है तो श्री कृष्ण ने रूप बदल बदल कर गोपियों के साथ भी रासलीला किया था। महारास लीला के समय भगवन शिव भी रूप बदल कर गोपियों के वेश में आये थे इस लिए इस स्थान का नाम गोपेश्वर महादेव भी है।

कहा जाता है की बंशी घाट में वंशी वट के तरह और कोई दूसरा बरगद का पेड़ नहीं है इसी कारण वृन्दावन के सभी श्रद्धालु अपना शकुन के पल बिताने यहाँ जरूर आते है।

राधादामोदर मंदिर

 shri Radhadamoder Mandir
source : shri Radhadamoder Mandir

श्री राधादामोदर मंदर वृन्दवन में घूमने की जगह में से एक है जो की कफी खुबशुरत और आकर्षक भी है।

श्री जीव गोस्वामी जी द्वारा इस मंदिर का निर्माण 1542 ई. में किया गया था जी की सेवा कुंड में बसा हुआ था।1670 ई. जब मुग़ल स्मार्ट यहाँ हमला किया था तो यहाँ के मूल देवता को कुछ समय के लिए  राजस्थान के जयपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था बाद में सब कुछ सही  बाद इसे 1739 ई. में वृन्दवन लाया गया।  राधा दामोदर देवता की सेवा क्या गया।  

यह सात  गोस्वामी मंदिरों में से एक है।  इस मंदिर में प्रवेश करते ही  आपको दो खंड देखने को मिलेंगे एक पार्थना कक्ष और दूसरे में सभी गोस्वामी महाराज की समाधी देखने को मिलेगी जैसे की श्रीला जीवा गोस्वामी, भूगर्भ गोस्वामी श्रील रूप गोस्वामी और कृष्ण दास कविराज गोस्वामी।  

 इस मंदिर की विशेता यह एक विशाल शिला में भगवन कृष्ण के पद चिन्न , उनकी बांसुरी और उनके गाय पैरों के निशान देखने को मिलता है जिसे देख के श्रद्धालु  कृतग्य हो जाते  हैं। 

 मंदिर के बारे में एक अलग मान्यता है अगर आप गोवर्धन की परिकर्मा नहीं कर पाते है हैं तो सिर्फ श्री  राधा दामोदर की 4 परिकर्मा कर लेने से आपको गोवर्धन परिकर्मा जिसे ही पुण्य मिलता है।  

यमुना नदी

Yamuna mandir
source : Yamuna Mandir

यमुना नदी वृन्दावन में घूमने की जगह में से एक है जो वृन्दवन के किनारे बसा हुआ है।  यमुना नदी हिन्दुओं के के लिए काफी पवित्र नदी मानी जाती है बिलकुल गंगा के ही तरह।  

यमुना आदि को भगवन कृष्ण की बहन के रूप में भी जाना जाता  है इस नदी की ऐसी मान्यता है की जो कोई भक्त जान इस नदी में डुबकी लगते है भगवान कृष्ण उसके सारे पाप हर लेते है यदि गलती से कोई पाप हुए हों तो अन्यथा जानबुज के किया गया पाप सिर्फ यमराज के द्वारा ही हरे जाते हैं।  

इसलिए जब कोई भी श्रद्धालु यहाँ आते है तो यमुना नदी में डुबकी लगाना बिलकुल भी नहीं भूलते हैं।  यहाँ आपको यमुना नदी के बहुत सरे घाट देखने को मिलेंगे सब की अलग  अलग और अपनी अपनी कहानियां हैं।  

रंगजी मंदिर

Rangi Mandir
Source : Rangi mandir

यह मदिर मथुरा वृन्दावन मार्ग  में स्थित है यह मंदिर भगवान विष्णु के रंग नाथ अवतार के समर्पण में बनाया गया एक भव्य मंदिर है।  रंगजी मंदिर का निर्माण सन 1851 में श्री रंगादिक स्वामी के द्वारा किया गया था। इस मदिर की  वास्तुकला कांचीपुरम के पेरुमल से प्रेरित है।  रंगजी मंदिर वृन्दावन में घूमने की जगह में से काफी प्रशिद्ध है।

इस  मदिर में भगवान  श्री कृष्ण के मूर्ति स्तापित है जो की दूल्हे के रूप में है और उसके उनकी दुल्हिन अंडाल की प्रतिमा है।  

यह मंदिर अंदर से बहुत बड़ा है इस मंदिर की नक्काशी देखकर भक्तगण आनंद विभोर हो उठते है। इस मदिर के अंदर कई छोटे छोटे मंदिर  मिलेंगे जो की राधा कृष्ण भगवान राम सीता और हनुमान जी के हैं। 

इस मंदिर में आपको एक उद्यान  भी देखने को मिलेंगे और इस मंदिर को दर्शन करने का समय 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक रहता है। इसी मदिर को रंगनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।  

कुसुम सरोवर

 kusum saraover
Source : kusum sarover

कुसुम सरोवर वृन्दावन में घूमने की जगह में से एक है जिसका सम्बंद राधा कृष्ण के युग से है।  इसके नाम से ही पता चलता है यह सरोवर तरह तरह के फूलों ओर कदम्बों के पेड़ों से घिरा हुआ है।  यह वही स्थान है जहाँ पे राधा अपनी सखियों के साथ भगवान  कृष्ण से चोरी चुपके मिलने आया करती थी। और यह वही जगह है जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने बाल गोपालों के साथ लुका छिप्पी का खेल खेला करते थे।   

यह सरोवर  वृन्दावन  से 2 किलोमीटर की दुरी में राधाकुंड के पास स्थित है।  यह स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है।  इसका निर्माण जवाहर सिंह द्वारा अपने पिता  सूरजमल की याद में करवाया था।  पहले यह कुंड कच्चा था फिर बाद में 1675 ई. में ओरछा के राजा ने इसे पक्का बनवाया।  इसके बाद यहाँ के राजा सूरजमल ने अपनी रानी किशोरी के लिए बाग – बगीचे का रूप देकर काफी खूबसूरत और आकर्षक बना दिया।  

मानसरोवर

Mansarover
Source :m Mansarover

वृन्दावन में घुमने की जगह में शामिल एक और खूबसूरत झील  मानसरोवर है जो की वृन्दावन से 5 किलोमिटेर माठ तहशील में बसा हुआ है।  

इस झील का निर्माण राधा के आंशुओं से हुआ था इसके पीछे का पौराणिक कथा है भगवान श्रीकृष्ण मथुरा से जाने से पहले वृन्दावन में इसी स्थान में सभी गोपियों के साथ माहारास किये थे।  

यह रासलीला इतनी खूबसूरत थी की भगवान शिव भी खुद को नहीं रोक पाए और नारी का रूप बना करके  रास में शामिल हो गए। 

लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें पहचान लिया और  नृत्य करते रहे।  यह सब देख कर राधा रानी नाराज हो गयी और दूर पहाड़ी में बैठ कर रोने लगी।  

इन्ही के बहते हुए आँशु से इस  मानसरोवर का निर्माण हुआ।  आज के समय में यह झील काफी मनोरम है।  यहाँ श्रद्धालुओं को अलग ही शुकुन और शांति मिलता है।  

 मदन मोहन मंदिर

Madan Mohan mandir
Source : Madan Mohan mandir

यह मंदिर वृन्दवन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है इसका निर्माण 1580में किया गया था।  यह मंदिर वैष्णव  सम्प्रदाय का मंदिर है।  इसका निर्माण राम दास खन्नी ने करवाया 1590 से 1626 के बीच करवाया था।  

एक प्रचलित कथा के अनुसार राम दास कन्नी  ( जिसे कपूरी नाम से भी जाना जाता है)  जो की पेशे से एक व्यापारी था।  अपने समान के साथ यमुना नदी पार कर रहा था नदी पर करते वक्त वह यमुना नदी में फंस गया।  इस बुरे वक्त में उसने भगवान श्री कृष्ण को याद किया प्रार्थना की उसके बाद  उसका नाव भवर से बाहर निकला।  

भगवान कृष्ण के इस चमत्कार से कृतज्ञ हो कर उसने एक मंदिर बनवाया और उनके  अनेक नामों में से एक नाम मदन मोहन भी रखा।  

श्री वृंदाकुंड

Sri vrindakund
Source : Sri Vrindakund

वृन्दावन में घूमने की जगह में से वृन्दाकुण्ड धार्मिक और पवित्र स्थलों में से एक है।  इसी जगह में वृंदा देवी रोजाना भगवन श्री कृष्ण और राधा के द्वारा बिताये जाने वाले पल को याद कर मन ही मन आनंदित होती थी और यहाँ पर वृंदा देवी की काफी खूबसूरत मूर्ति भी है  इसी वजह से इस कुंड को वृंदाकुंड के नाम से जाना जाता है।   

 निदिवन

Nidhiwan
Source : Nidhiwan

वृन्दवन में घूमने की जगह में सबसे रहस्य्मयी जगह निधिवन है।  जो की प्रेम मंदिर से 4 किलो मीटर और 1 किलोमीटर की दुरी में बसा हुआ है।  

इसी जगह में भगवन कृष्ण ने राधा रानी का शृंगार किया था और महारास लीला भी किया था। यात्रा के दौरान श्रद्धालु यहाँ आना कभी भी नहीं भूलते है।  

अगर आप यहाँ आते है तो फिर निधिवन में आपको भगवान श्री कृष्ण का मंदिर भी देखने को मिलेगा  , जिसमे भगवान श्री कृष्ण का शयनयान भी सजाया जाता है और रात्रि के समय के समय भगवान स्वयं राधा के साथ रास लीला करने आते हैं।  

यही वजह के शाम के वक्त निधिवन मंदिर  के बंद होने से पहले ही सारे प्राणी यहाँ से चले जाते हैं  और यदि गलती से भी को इस रास लीला आया दिव्य शक्ति को अपनी खुली आँखों से देख तो वह या तो पागल हो जाता है या फिर उसकी मौत हो जाती है।  

सेवा कुंज

Sewa kunj
Source : Seva kunj

सेवा कुञ्ज भी वृन्दावन में घूमने की जगह में से काफी खूबसूरत जगह है।   जहाँ आपको एक अलग   ही लेवल का शांति मिलेगा जहाँ आप लम्बे समय तक मैडिटेशन कर सकते है और कृष्ण की भक्ति का भरपूर मजा ले सकते हैं। 

कहा जाता है की इस जगह पर भगवान कृष्ण और राधा ने काफी समय बिताये थे।  

इस जगह में काफी  खूबसूरत पेड़ और खूबसूरत पौधे मिलेंगे।  और यह जगह साधना तपस्या के लिए सर्वोत्तम जगह है यदि आप इस जगह में बैठ कर  मेडिटेशन करते हैं तो आपको कृष्ण की काफि निकटता महसूस होती है और आप ध्यान की चरम सीमा तक पहुंच सकते हैं।  यहाँ आपको भगवन कृष्ण के बहुत सरे भक्त मिल जायेंगे।  

कालियादेह घाट

kaliya deh Ghat
Source : Kaliya Deh Ghat

कालियादेह घाट वृन्दावन में घूमने की जगह में से काफी प्रशिद्ध दार्शिनय स्थलों में से एक है।  यह वही जगह है जहा भगवान कृष्ण ने अपने बाल काल में कदम के पेड़ से यमुना नदी में छलाँग लगाया था और  कालिया नाग के सर पर नृत्य किया था।  

इस तरह से यमुना नदी को कालिया नाग के जहर से  मुक्ति दिलाई थी उस समय इसी जगह से यमुना नदी बहा करती थी लेकिन इस समय यह 100 मीटर आगे चली गयी है।  

पागल बाबा मंदिर

Pagal Baba mandir
Source : Pagal Baba Mandir

मंदिर  मार्ग से फूल के  सामान दिखने वाला यह मंदिर वृन्दावन में घूमने की जगह में से काफी खूबसूरत जगह है।  जो की 10 मंजिला संमरमर की मंदिर  है।  यह अपनी खूबसूरती से हर किसी को मोहित कर लेती है।  

कहा जाता है की इसी जगह में भगवन कृष्ण राधा के लिए बांसुरी बजाय करते थे।  यह मदिर इतनी खूबसूरत है की इसे लोग देखते है तो बस देखते ही रह जाते हैं।  

इस  मंदिर की विशेषता यह है की यह मंदिर सभी धर्मो की एकजुटता का सन्देश देता है।  यहाँ आपको  पहले मंजिल में चर्च , दूसरे में मास्जिद , तीसरे में गुरुद्वारा  और चौथे में हिन्दू धर्म के मंदिर देखने को मिलेंगे।  

मंदिर की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता है की यह 10 मंजिला मंदिर 800 फ़ीट लम्बा और 120 चौड़ा है।  

यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5 : 30 से 11: 00 बजे तक खुला रहता है है और शाम के समय 3: 00  बजे से 9 : 00  बजे तक खुला रहता है।  

वैष्णो देवी मंदिर

Prem Mandir
Source : Prem Mandir

विष्णो देवी मंदिर वृन्दावन में घूमने की जगह में से एक और पवित्र और दर्शनीय स्थल है।  इस मंदिर की दुरी बांके  बिहारी से 8 किलोमीटर और प्रेम मंदिर से 3 किलोमीटर है। 

यहाँ आपको माँ दुर्गा की 141 फ़ीट की मूर्ति देखने को मिलती है जिसके चरणों में हनुमान जी बैठे हैं , यह एक रिकार्ड के रूप में लिम्का बुक में दर्ज है।  मंदिर के गर्भगृह में  दुर्गा के नौ अलग अलग सवरूपों  की मूर्तियों को स्थापित किया गया है। 

इस्कान मंदिर

Iskon mandir vrindawan
Source : Iskon Mandir Vrindwan

इसे अंगजों का भी मंदिर कहा जाता है और यह वृन्दावन में घूमने की जगह में से सारे खूबसूरत मंदिरों में से एक है।  यह मंदिर भगवान कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के समर्पण में बनाया गया है।  1774 बनाया गाया था कहा जाता है यहाँ भगवन कृष्ण अपने दोस्तों के साथ खेलने और गाय चराने आया करते थे।  

यहाँ 24 घंटा भजन कृतन होते रहता है और यदि आप वेजेटेरियन भोजन पसंद करते हैं तो यह आपके लिए किसी  स्वर्ग से काम नहीं है।  मंदिर परिसर में ही आपको एक बहुत बड़ा रेस्टोरेंट मिल जायेगा जी की काफी खूबसूरत भी है।  यहाँ आप कभी भी सस्ता अच्छा और वेजीटेरियन खाना ले सकते है।  

इस्कॉन के संस्थापक श्री भक्ति वेदांतस्वामी प्रभुपद्य है जिसकी महिमा विदेशो में भी देखने को मिलती है और यहाँ भी आप काफी सरे विदेशियों को  भजन कीर्तन करते देख सकते हैं जिसमे कृष्ण के प्रति अतयंत समर्पण देखने को मिलता है और यही वजह है की इसे अंग्रेजों के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।  

मदिर के खुलने का समय 9 बजे से 12 :30 बजे तक होता है और शाम को 4 से 8:15 के बीच होता है।  

बांके बिहारी मंदिर

 Banke bihari mandir
Source :Banke bihari mandir

वृन्दावन में घूमने की जगह में यह मंदिर सभी पर्यटन स्थलों में से प्रमुख  मंदिर है।  यह मंदिर काले और सफ़ेद संगमरमर की नक्काशी के द्वारा बनाया गया है इस मदिर को हिन्दू शैली के द्वारा बनाया गया है जिसके वजह से इसकी खूबसूरती और भी बाद जाती है।  

इसकी धार्मिक मान्यता बाकि अन्य मंदिरों   ज्यादा है इसे 1864  में बनाया  गया था।   इस मंदिर का मुख्य मूर्ति बाल रूप में है और भगवान कृष्ण त्रिभंग मुद्रा में स्थित है।  

बांके बिहारी के स्नेह और भक्ति के कई कहानियां है जो की भक्तगण के सारे दुःख दर्द हर हैं।  इसी कारण से पुजारी भक्तों और भगवान के बीच पर्दा रखते है क्योंकि मंदिर में दिव्य  शक्ति है जो भक्त को अपने तरफ खिंच लेता है।  यहाँ आप भगवन कृष्ण की दिव्य सकती की उपस्थिति का आभास कर सकते हैं।

मंदिर के दर्शन का समय सुबह 7: 45 से 12 : 00 तक और 5:30 से 9: 30 तक रहता है।    

श्री राधा रमन मंदिर

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Source : Vrindawanonline.in

राधा रमन मंदिर वृन्दवन के सभी पूजनीय और प्रशिद्ध मंदिरों में से एक है और यह वृन्दावन में घूमने की जगह के लिए भी काफी प्रशिद्ध है। ।  इसे कृष्ण के समर्पण में बनाया गया है  जो की राधा रमन के रूप में पूजनीय है।  इस का निर्माण 1542ईस्वी में गोपाल भट्ट गोस्वामी ने कराया था , और इन्होने चैतन्य महाप्रभु के सिद्धन्तों का अनुकरण किया था।  यह  वृन्दावन के सात ठाकुर मंदिरों में से एक के तरह ही मन जाता है।  

मंदिर के पट खुलने का समय सुबह 8: 00 से 12 : 30 और शाम को 6 : 00 बजे से 8 : 00 बजे होता है।  

प्रेम मंदिर

prem mandir
Source : Prem Mandir

यह मंदिर वृन्दवन में घूमने की जगह सबसे बड़ा, प्रशिद्ध और पर्तिस्तापित मंदिरों  में से एक है।  यह मंदिर भगवन कृष्ण और राधा के संपार्पण में बनाया गया है।  यह मंदिर पूरी तरह से नया है।  इसका शिलान्यास 2001 में हुआ था तथा यह 2012 में बनकर कम्पलीट हुआ था। 

इस मंदिर को बनाने में 150 करोड़ भारतीय रूपये खर्च हुए थे और इस मंदिर के दायरे में अभी भी 54 एकड़ की सम्पति है इस मंदिर को इटालियन करारा मार्बल से बनाया गया है।  

यह मंदिर दो मंजिला संगमरमर से बना है जो की इस शहर के अधाय्तिम्क और सांस्कृतिक महत्त्व को पारदर्शित करती है।  आप मंदिर के आंतरिक भागों राधा कृष्ण के भीति चित्र सजे पाएंगे। मंदिर चारों तरफ से एक बहुत बड़े बगीचे से घिरा हुआ है।  इस बगीचे में कई  विशाल मूर्तियां भी देखने को मिलती है जो की रास लीला को  करते हैं।  

यह मंदिर सप्ताह में सातों दिन खुला रहता है 5 :30 बजे से 8: 30 तक खुला रहता है।   

श्री गोविन्द देव जी मंदिर

govind devji mandir
Source : Govind Devji Mandir

वृन्दावन में घूमने जगह में से गोविन्द देव मंदिर भी शामिल है , यह मन्दिर वैष्णव संप्रदाय का बना है।  इस इस मंदिर कि वास्तुकला अध्भुत है।  इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु के समर्पण में  बनाया गया है 

वृन्दावन के आसपास घूमने की जगह(Place to Visit Near Vrindavan)

  • प्रेम मंदिर
  • निधिवन
  • श्री कृष्णा बलराम मंदिर
  • श्री राधा दामोदर देवजी मंदिर
  • श्री पागल बाबा मंदिर
  • माँ वैष्णव देवी धाम
  • जामा मस्जिद
  • रंगजी मंदिर
  • द्वारिका धीश मंदिर

1 दिनों में मथुरा और वृन्दावन घूमने कि जगह(Place to Visit in Vrindavan in One Day)

  • श्रीकृष्ण जन्म भूमि मंदिर
  • बांके बिहारी मंदिर
  • रंगनाथ मंदिर
  • प्रेम मंदिर
  • शाहजी मंदिर गोवर्धन हिल
  • राधा दामोदर मंदिर
  • गोविन्द देव मंदिर
  • इस्कॉन मदिर
  • मदन मोहन मंदिर
  • निधिवन
  • श्री वृद्धाकुंड

वृन्दावन का प्रशिद्ध और स्थानीय भोजन

वृन्दवन सिर्फ अपने मदिर दार्शिनय स्थलों और यहाँ के वातावरण के कारण ही नहीं जाना जाता है। यह अपने मिठाइयों और दूध से बनने वाले सात्विक भोजन के लिए भी काफी प्रशिद्ध है।

वृन्दवन के कुछ प्रसिद्ध मिठाइयां जिसे आप कभी भी नहीं भूल सकते है लस्सी , राबड़ी, मालपुवा, कचोरी, समोसा, माखन मिश्री, पेड़ा, चाय, घेवर, भल्ले पपड़ी, जलेबी, आलू पूरी, गुजिया, कुल्फी, तेहरी, बधाई , भिंडी सालन, रेवड़ी, दम आलू और फरा यात्रा के दौरान भोजनों का स्वाद लेना कभी भी न भूलें यह आपके यात्रा को और भी यादगार बना देगा।

वृन्दावन में रुकने की जगह(Vrindavan me Rukne ki Jagah)

अगर आप वृन्दावन घूमने के लिये जा रहे है तो बिलकुल भी रुकने की जगह के बारे चिंता न करें। यहाँ आपको अनेकों अनेक होटल तथा धर्मशालाएँ मिल जाएगी। आप अपने बजट के हिसाब से जिसे चाहें चुन सकते है।

वृन्दवन के कुछ मंदिर जैसे की पागल बाबा मंदिर, कृष्ण बलराम मंदिर और प्रेम मंदिर इनमे श्रद्धलुओं की रुकने की काफी अच्छी व्यवस्था की गयी है।

आपको यहाँ 500 से 5000 के बीच का होटल और धर्मशालाएं मिल जाएगी। अगर आप के पास बजट है तो आप इत्मीनान से फिट हो सकते है।

लेकिन अगर आप बजट ट्रैवलर हैं तो चिंतित न हो वृन्दावन में रहने के लिए वृन्दावन की धर्मशालाएं मिल जाएगी , जिसे उत्तर प्रदेश की सरकार ने वृन्दावन के तीर्थ यात्रियों और भक्तों के बजट को देख कर बनाया है। यहाँ आपको बहुत सारे डोरमेट्री , सार्वजनिक हॉल तथा कमरे मिलेंगे।

जिसका किराया 50 रुपया से लेकर 100 रुपया तक होता है। 50 रुपया में आप जमीन में गद्दा बिछा के सो सकते है। अगर आप कमरे की सुविधा चाहते है तो 600 रूपये में 4 बेड वाला और 750 रूपये में 5बेड वाला मिल जायेगा।

अगर आपको वृन्दावन में सस्ती और अच्छी धर्मशालाएँ चाहिए तो इन धरमशालाओं में जाना न भूलें

  • माहेश्वरी भवन धर्मशाला
  • कृष्ण सुदामा धाम
  • श्री राधा कृष्ण धाम
  • सेठ मुरलीधर मानसिंगका धर्मशाला
  • सुखधाम सदन धर्मशाला
  • श्री शिव कृष्ण धाम
  • वृन्दावन सेवासदन
  • महाराजा अग्रसेन धर्मशाला
  • श्री गिरिराज सेवा सदन
  • लीला माँ सत्संग भवन

अगर आप वृन्दावन में निःशुल्क आश्रम की तलाश में हैं जो निःशुल्क या दान सेवाओं से चलता है। वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर, राधा माधव धाम और इस्कॉन वृन्दवन कुछ ऐसे आश्रम है जो निःशुल्क स्थाई प्रवास के लिए जाने जाते है।

वृन्दावन जाने का सबसे अच्छा समय

आप साल के किसी भी महीने में वृन्दवन आ सकते है। लेकिन अगस्त से मार्च के समय यहाँ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का काफी भीड़ देखा जाता है क्योंकि इसी दौरान सारे मुख्य पर्व त्यौहर जैसे जन्मास्टमी, राधाअस्टमी और होली होते हैं।

वृन्दावन घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड के समय होता है यहाँ का ठण्ड दक्षिण भारत की तुलना में बहुत ही जयादा होता है , इसलिए अगर उतर भारत से यहाँ आ रहे है तो अपने साथ अपने आप को ठण्ड से बचने के लिए सारे ठण्ड के कपडे साथ रखें।

गर्मियों के समय उच्च तापमान और आद्रता के कारण यहाँ के दर्शनीय स्थलों का भर्मण काफी असुविधाजनक होता है। मानसून में भरी बारिश के कारण भी यही हाल होता है।

ठण्ड के समय यहाँ का मौसम काफी सुहावना, सुखद और आरामदायक होता है इसलिए जब कभी भी यात्रा की योजनायें बनायें तो हमेशा ठंडी के महीनों को ही चुने।

होली का महीना भी इसी समय होता है जिसके कारण यहाँ एक अलग ही धूम मची रहती है। कृष्ण और गोपियों की रासलीला और होली की बात ही अलग होती है। इसी दौरान सरे उत्सव जन्माअस्टमी, राधाअस्टमी सारे इसी ऋतू में मनाये जाते है। अतः इसे कभी भी मिस न करें।

वृन्दावन कैसे जाएँ

आप भारत के किसी भी राज्य से है वृंदावन आप असनी से आ सकते है लेकिन उसके पहले आपको जानकारी एकत्रित करनी होगी। यहाँ आपको तीनो माध्यम से वृन्दावन जाने की जानकारी मिल जाएगी आप अपने बजट और लोकेशन के हिसाब से अपना ट्रिप प्लान कर सकते हैं।

रेल मार्ग से

वृन्दवन का नजदीकी स्टेशन मथुरा है लेकिन मथुरा के लिए हर छोटे बड़े स्टेशनों से आपको ट्रैन नहीं मिल सकता है। इसलिए पहले आप वैसे स्टेशनों के लिए ट्रैन टिकट लेना है जहाँ से डायरेक्ट मथुरा के लिए गाड़ी मिलता हो। उसके बाद मथुरा के लिए टिकट बुक करा लें और मथुरा स्टेशन पहुंचते ही वह आपको वृन्दावन वन के ऑटो रिक्शा मिल जयेगी जहाँ से १० से १५ किलोमीटर की दुरी पर वृन्दवन है।

बस द्वारा

भारत के सभी प्रमुख शहरों से जैसे बरेली कानपूर ग्वालियर आगरा और मुरादाबाद से मथुरा के लिए बस चलती है। दिल्ली से कई बसें डायरेक्ट वृन्दावन के लिए चलती है

अगर आप ऐसे शहरों में रहते हैं तो जहाँ से डायरेक्ट बस वृन्दावन के लिए चलती है तो फिर आपके लिए किस भी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन आप ऐसे शहरों से हैं जहा बस सुविधा डायरेक्ट उपलब्ध नहीं है तो पहले आप को ऐसे शहरों के लिए बस पकड़ना होगा जहाँ से वृन्दावन के लिए सीधे बस की सुविधा उपलब्ध है।

अगर आपको मथुरा के लिए बस मिलती है तो फिर आप मथुरा से वृन्दावन के लिए टैक्सी ऑटो रिक्सा ले सकते हैं।

हवाई जहाज द्वारा

वृन्दवन का नजदीकी हवाई अड्डा लखनऊ है। आप किसी भी राज्य से हैं लगभग आपको सभी राज्यों से लखनऊ के लिए हवाई सेवाएँ मिल जाएगी। पहले आप अपने शहर से नजदीकी हवाई अड्डा पहुंचे और फिर लखनऊ के लिए फ्लाइट बुक करें।

लखनऊ पहुँचते ही आप अपनी सुविधा अनुसार लोकल ट्रैन के माध्यम से या फिर सड़क मार्ग से बस ऑटो टक्सी के द्वारा आसानी से वृन्दावन पहुँच सकते हैं।

वृन्दवन घूमने में कितना खर्च आता है

अगर आप वृन्दावन जाने की सोच रहे है या जाना चाहते है तो सबसे पहले आपको अपना बजट देखना होता है। अपना बजट तैयार करने से पहले जान लें की वृन्दावन हिन्दुओं का पवित्र धार्मिक स्थल है जो की विशेष रूप से अपने पूजा पाठ के लिए जाने जाते हैं। और यह एक संत फकीरों का जगह है। इसी कारण से आप यहाँ काम खर्च में भी असनी से अपनी छुटियाँ बिता सकते हैं।

यहाँ आपको बहुत सारे खूबसूरत मंदिर उपवन देखने को मिलेंगे और इन मंदिरो में भारत के प्रशिद्ध शिल्पकारों के अद्भुत कलाकृतियाँ देखने को मिलती है। वो सरे निशुल्क हैं।

कहने का मतलब आप पुरे वृन्दावन को कम से कम 500 रुपयों में और अधिक से अधिक 5000 रुपयों में घूम सकते हैं।

और इसके अलावा यदि आप वृन्दवन में एक या दो दिन के निशुल्क रुकना चाहते हैं तो रुक सकते हैं क्योंकि यहाँ की जगहों में लंगर की व्यवस्था भी है और गोरिगोपल जैसे आश्रमों में आप निशुल्क भी रात भर के लिए ठहरने की भी व्यवस्था है।

उतर प्रदेश के सरकार ने वृन्दवन के भक्तों के बजट के अनुसार टूरिस्ट फसिलिटी सेण्टर का निर्माण करवआया है जहाँ आपको 50 से 150 के बीच रहने के लिए बेड मिल जायेंगे।

वृंदावन में घूमते समय साथ में क्या रखें

अगर आप वृन्दावन घूमने जा रहे है या घूमने का मन बना लिया है तो वहां जाने से पहले आपको यह जान लेना अतिआवशयक है की वह आपको अपने साथ क्या क्या ले जाने की जरुरत है इसके लिए आपको वह की मौसम और जलवायु को जानना बहुत ही जरुरी है।

जिसे की हम सभी जानते है कही भी जाने के लिए अपने साथ अपन पहचाहन पत्र और उसके बाद पर्याप्त रुपया होना बहुत ही जरुरी है।

चूँकि यह वृन्दवन एक पवित्र धार्मिक स्थल है जो अपने पूजा पाठ के लिए जाना जाता है इसलिए यहाँ आते वक्त आपको किसी भी तरह की पूजा पाठ की सामग्री लाने की जरुरत नहीं है , सारे कुछ आपको यही मिल जायेंगे।

इसके अलावा यदि आप वृन्दवन घूमने जा रहे है तो जैसा की आपको पता होना चाहिए , यहाँ का ठंडी दक्षिण भारत की तुलना में काफी ज्यादा होती है इसलिए ठंडी के मौसम में उपयोग होने वाले गर्म कपडे आपको अपने साथ रखने होते हैं।

निष्कर्ष

इस लेख में आपको वृन्दवन में घूमने की जगह (Vrindavan Me Ghumne ki Jagah), वृन्दावन के पर्यटनीय स्थलों , कहा घूमेऔर कैसे घूमे , कैसे जाएँ , कहाँ रुके और यात्रा के दौरान अपने साथ क्या रखें। वृन्दावन और वृन्दवन की यात्रा से जुडी साडी जानकारी आपको आसानी से मिलेगी।

यात्रा के दौरान यहाँ आपको कितना खर्च करना पड़ सकता है इन सारी चीजों की जानकारी आपको यहाँ आसानी से मिल जाएगी।

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FAQ 

वृन्दावन में जाने का सही समय कोन सा होता है ?

वृन्दावन जाने का सही समय ओक्टुबर से मार्च के बीच होता है। क्योंकि इस समय यहाँ का मोसैस ठंडा है और काफी सुहावना भी होता है।
गर्मी और बरसात के समय यहाँ का मौसम सही नहीं होता यही जिस कारण से आपको अपने रूम में दुबके रहना पड़ता है जो की आपके यात्रा में खलल दाल देता है।

वृन्दावन में ठहरने के लिए बेहतर जगह कोन सा है ?

वृन्दावन में ठहरने के लिए आपको बहुत सारे होटल और धर्मशालायें मिलते है आप अपनी बजट के हिसाब से किसे को भी चुन सकते हैं।

वृन्दावन में घूमने में कितने दिनों का समय लगता है ?

3 दिन में आप वृन्दावन आसानी से घूम सकते हैं।

वृन्दावन में प्रशिद्ध मंदिर कौन – कौन से हैं?

यहाँ के विशाल संख्या में राधा रानी और भगवान कृष्ण के मंदिर देखने को मिलते हैं। उनमे से कुछ मंदिरों के नाम हैं। प्रेम मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, राधा रमन मंदिर, राधा रमन मंदिर।

वृन्दावन में सस्ती धर्मशाला कोन सी है ?

सुदामा कुटी में आप कुछ दिनों के लिए आप निशुल्क रुक सकते हैं यदि वहाँ के मुख्य संत आपको रहने की अनुमति दे। इनके अलावा कुछ धर्मशालाएं कम बजट में भी मिल जाएँगी
जिसे आप अपने बजट के अनुसार चुन सकते हैं – वृन्दावन सेवा सदन, श्री गिरी राज सेवा सदन, महाराजा अग्रसेन धर्मशालाएं, लीला माँ श्री शिव कृष्ण धाम।

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